NIOS Class 12 Painting Chapter 14 भित्तिचित्र एवं छापाचित्र

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NIOS Class 12 Painting Chapter 14 भित्तिचित्र एवं छापाचित्र

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Chapter: 14

Part – 1: सिद्धांत
पाठगत प्रश्न 14.1

1. अजंता में कुल कितनी गुफाएं हैं?

(i) 30 गुफाएं। 

(ii) 20 गुफाएं।  

(iii) 10 गुफाएं।  

(iv) 5 गुफाएं। 

उत्तर: (i) 30 गुफाएं। 

2. भित्ति का माध्यम क्या है?

(i) वाश। 

(ii) टेंपरा।  

(iii) स्याही।  

(iv) ये सभी।  

उत्तर: (ii) टेंपरा माध्यम। 

पाठागत प्रश्न 14.2

1. छपाई की तकनीक में छापे किस सामग्री के बने होते हैं?

उत्तर: छपाई की तकनीक में छापे विभिन्न सामग्री के बने होते हैं; जैसे- रबड़, लकड़ी, मोम एवं साबुन।

2. छपाई के इन सांचों का प्रयोग कितने समय तक किया जा सकता है?

उत्तर: छपाई के इन छापों का प्रयोग प्रयुक्त सामग्री की मजबूती के अनुरूप लंबे समय तक किया जा सकता है।

3. छपाई की तकनीक में चित्र को कितनी बार में अंतिम रूप दे दिया जाता है?

उत्तर: छपाई की मदद से चित्र को एक बार में पूरा किया जा सकता है।

पाठागत प्रश्न 14.3

1. इस तकनीक से चित्र बनाने में समय कम कैसे लगता है?

उत्तर: इस तकनीक से बार-बार ठप्पे द्वारा छाप कर हजारों की संख्या में चित्र बनाए जा सकते हैं।

2. भाषा लिपि छापने के लिए किस सब्जी का प्रयोग किया जाता है?

उत्तर: आलू, जमीकंद और शकरकंदी की मदद से अक्षर और अंक बनाए जाते हैं।

पाठागत प्रश्न 14.4

1. अंगूठे छापा चित्रण तकनीक में छापे हेतु शरीर के किस अंग का प्रयोग किया जाता है?

Ans: इस तकनीक में छपाई हेतु अंगूठे एवं अंगुलियों का प्रयोग किया जाता है।

2. अंगूठे छापा चित्रण तकनीक में रंग कैसे लगाया जाता है?

Ans: इस तकनीक द्वारा चित्र बनाने के लिए अंगुली की नोक पर रंग लगाकर सतह पर छापा जाता है।

3. अंगूठे छापा चित्रण तकनीक में पैन अथवा ब्रश का प्रयोग क्यों करते हैं?

Ans: इस तकनीक में चित्र को पूरा करने के लिए पैन अथवा ब्रश का प्रयोग होता है।

पाठांत प्रश्न

1. भित्तिचित्र बनाने की तकनीक एवं माध्यम के विषय में अपने शब्दों में लिखिए। 

उत्तर: भित्तिचित्र (Mural) बनाने के लिए कई प्रमुख माध्यमों का प्रयोग किया जाता है, जैसे – फ्रेस्को, टेंपरा, तैलचित्र, पच्चीकारी (Mosaic) और रंगीन कांच। इसे बनाने की तकनीक काफी विस्तृत है। सबसे पहले शिल्पियों द्वारा पत्थर की गुफाओं की दीवार को छैनी और हथौड़े से काटकर समतल किया जाता है। इसके बाद पत्थर के बारीक चूरे, गोबर और धान की भूसी को मिलाकर दीवार पर पहला लेप लगाया जाता है। फिर बारीक चट्टानी पाउडर या रेत के साथ रेशेदार वनस्पति सामग्री और मिट्टी मिलाकर दूसरा लेप तैयार कर लगाया जाता है। अंत में इसके ऊपर चूने का प्लस्तर चढ़ाया जाता है। इस प्रकार तैयार की गई गीली दीवार पर रूप-रेखा (outlines) खींची जाती है और फिर रिक्त स्थानों में रंग भरा जाता है। इन भित्तिचित्रों में खनिज और वनस्पति रंगों का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है।

2. छापाचित्र का आरंभ क्यों और कैसे हुआ? 

उत्तर: छापाचित्रण (Printmaking) सदियों पुरानी तकनीक है जिसकी जड़ें मुख्य रूप से लोककला में पाई जाती हैं। इसका आरंभ आम जनमानस द्वारा विभिन्न पारंपरिक उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियों के लिए किया गया था। प्राचीन काल में लोग अपने घरों की दीवारों, मिट्टी के बर्तनों और वस्त्रों को सजाने के लिए इस विधा का प्रयोग करते थे। शुरुआत में लोग प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करके हथेलियों, उंगलियों, अंगूठे या पैर के पंजों की मदद से जमीन और दीवारों पर छाप लेते थे। समय के साथ इस कला का विकास हुआ और लोग विभिन्न सब्जियों, मिट्टी, पत्थर और लकड़ी के ठप्पे (ब्लॉक) बनाने लगे। बाद में इसका प्रयोग वस्त्र छपाई और यहाँ तक कि किताबों तथा दस्तावेजों को छापने के लिए भी होने लगा।

3. छापाचित्र कितने प्रकार से बनाए जाते हैं? 

उत्तर: पाठ के अनुसार, छापाचित्र तकनीक के मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार बताए गए हैं:

ब्लॉक प्रिंटिंग (जैसे लिनोकट): इसमें लकड़ी, रबर, मोम, या साबुन की सपाट सतह पर आकृति उकेर कर ठप्पे बनाए जाते हैं। लिनोलियम ब्लॉक पर डिजाइन उकेर कर छपाई की जाती है।

सब्जियों द्वारा छापाचित्रण: इस तकनीक में विभिन्न सब्जियों को काटकर उनके ठप्पे या ब्लॉक बनाए जाते हैं और रंग लगाकर छपाई की जाती है।

अंगूठे एवं अंगुलियों द्वारा छापाचित्रण: इसमें हाथ के अंगूठे या अंगुलियों (यहाँ तक कि हथेलियों और तलवों) पर रंग लगाकर सतह पर छापा जाता है और फिर पेन या ब्रश से उसे मनचाही आकृति (जैसे पशु-पक्षी) का रूप दिया जाता है।

4. छापाचित्र बनाने के लिए प्रयोग की जाने वाली सब्जियों की सूची बनाइए। 

उत्तर: छापाचित्र बनाने के लिए आमतौर पर ऐसी सब्जियों का प्रयोग किया जाता है जिन्हें काटने पर एक सुंदर प्राकृतिक बनावट (texture) या आकार प्राप्त होता है। पाठ में दी गई सब्जियों की सूची इस प्रकार है: आलू, भिंडी, शिमला मिर्च, प्याज, कमल-ककड़ी, जिमीकंद, शकरकंदी और टमाटर। इन सब्जियों को बीच से या उपयुक्त स्थान से काटकर (क्रॉस सेक्शन करके) ठप्पे (block) के रूप में प्रयोग किया जाता है।

5. छापाचित्र के उपयोगों की विस्तार सूची तैयार कीजिए। 

उत्तर: छापाचित्र एक बहुत ही उपयोगी और आकर्षक कला है। 

इसके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं:

(i) बधाई संदेश (Greeting cards) और गिफ्ट बॉक्स तैयार करने में।

(ii) पेपर बैग, लैंप शेड और कॉपियों की जिल्द (covers) बनाने में।

(iii) विभिन्न क्राफ्ट (शिल्प) की वस्तुओं को सजाने में।

(iv) घरों की दीवारों और फर्श को अलंकृत करने में।

(v) वस्त्रों पर छपाई (Textile printing) करके उन्हें सजाने में।

(vi) किताबों और दस्तावेजों (documents) की छपाई में।

6. अक्षरों अंकों को उल्टा क्यों उकेरा जाता है? 

उत्तर: जब हम किसी ब्लॉक (जैसे आलू या लकड़ी) पर भाषा की लिपि, अक्षरों या अंकों को छापने के लिए उकेरते हैं, तो उन्हें हमेशा उल्टा उकेरा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि छपाई की प्रक्रिया (Printmaking) विपरीत या दर्पण प्रतिबिंब के सिद्धांत पर काम करती है। यदि हम ठप्पे पर अक्षरों को सीधा उकेरेंगे, तो छपाई के बाद वे उल्टे छपेंगे। इसलिए, छपाई के बाद कागज या सतह पर लिपि बिल्कुल सीधी और सही दिशा में प्राप्त हो सके, इसके लिए ब्लॉक पर अक्षरों को जानबूझकर उल्टा उकेरा जाता है।

7. छपाई की तकनीक किसी अन्य तकनीक से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: छपाई (Printmaking) की तकनीक सामान्य चित्रकला से कई मायनों में बहुत भिन्न और लाभकारी है:

समय की बचत: इस तकनीक के माध्यम से एक बार ठप्पा (block) तैयार हो जाने के बाद, बहुत ही कम समय में हजारों की संख्या में चित्र छापे जा सकते हैं।

एकरूपता: छपाई से प्राप्त होने वाले सभी चित्रों में एकरूपता (Uniformity) रहती है, जो हाथ से बार-बार चित्र बनाने पर संभव नहीं है।

पुनरावृत्ति में आसानी: इसमें चित्रों को अलग से बार-बार अंतिम रूप (final touch) देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है; बस ब्लॉक पर रंग लगाओ और छापो।

8. पद्मपाणि बोधिसत्व का स्थल कौन-सी गुफा है? 

उत्तर: पद्मपाणि बोधिसत्व का प्रसिद्ध और उत्कृष्ट भित्तिचित्र महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित अजंता की गुफा संख्या एक (Cave No. 1) में स्थित है। यह मानव आकार के बराबर बना एक विशाल भित्तिचित्र है जो भारतीय चित्रकला का एक महान उदाहरण माना जाता है।

9. इस भित्ति के लिए सफ़ेद, हरा और पीला रंग कैसे बनाया गया? 

उत्तर: अजंता के भित्तिचित्रों को बनाने के लिए चित्रकारों के पास गिने-चुने प्राकृतिक रंग ही उपलब्ध थे, जिन्हें वे मुख्य रूप से मिट्टी, वनस्पति और पत्थरों से तैयार करते थे:

सफ़ेद रंग: यह खड़िया (Chalk) अथवा चूने से बनाया जाता था।

नींबू (पीला/हरा) रंग: पाठ में नीबू (lemon) जैसा रंग प्राप्त करने के लिए ‘ट्रैरावर्ट’ (टेरावर्ट पत्थर) का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त लाल और गेरुआ रंग गेरू से, तथा नीला रंग नील और ‘लापीस लाजुली’ (Lapis Lazuli) पत्थर से बनाया जाता था।

10. पद्मपाणि बोधिसत्व की आकृति विशेष क्यों है? 

उत्तर: पद्मपाणि बोधिसत्व की आकृति अपने कलात्मक और आध्यात्मिक भावों के कारण बहुत विशेष है:

भाव-प्रवणता: भगवान बुद्ध के मुखमंडल पर विश्वचिंतन, त्याग, वैराग्य और गहरी शांति के भाव अत्यंत स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। उनकी नीचे की ओर झुकी हुई ध्यानमग्न आँखें यह दर्शाती हैं कि वे सांसारिक कष्टों के प्रति चिंतित हैं और उनका निवारण करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

प्रतीकात्मकता: उन्होंने हाथ में नीले रंग का कमल (पद्म) पकड़ा हुआ है। मोतियों, नीलम और अन्य रत्नों से जड़ित उनका सुंदर मुकुट उनके राजवंशी होने का प्रतीक है।

कलात्मक कौशल: चित्रकार ने लयबद्ध रेखाओं, वैविध्यपूर्ण और संयमित रंग-योजना, हस्त-मुद्रा (hand gestures), और आभूषणों के अलंकरण में अपने संपूर्ण कौशल का परिचय दिया है। यह चित्र बुद्ध की आध्यात्मिक जागृति का प्रतिनिधित्व करता है और उनके शांत, आनुपातिक शरीर द्वारा एक आदर्श परिष्कृत मनुष्य की छवि प्रस्तुत करता है।

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