NIOS Class 12 Painting Chapter 12 भारतीय कला में फ्रैस्को एवं टेंपरा

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NIOS Class 12 Painting Chapter 12 भारतीय कला में फ्रैस्को एवं टेंपरा

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Chapter: 12

Part – 1: सिद्धांत
पाठगत प्रश्न 12.1

A. सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

1. ‘मरणासन्न राजकुमारी’ का चित्र कौन सी गुफा में है?

(i) गुफा संख्या 1

(ii) गुफा संख्या 2 

(iii) गुफा संख्या 5 

(iv) गुफा संख्या 16

उत्तर: (iv) गुफा संख्या 16

2. ‘मरणासन्न राजकुमारी’ का माध्यम क्या है?

(i) टेंपरा।

(ii) वॉश तकनीक। 

(iii) कागज़ की स्याही। 

(iv) इनमें से कोई नहीं। 

उत्तर: (i) टेंपरा माध्यम।

पाठगत प्रश्न 12.2

1. अजंता के चित्र किन कथाओं पर आधारित हैं? 

उत्तर: अजंता के चित्र जातक कथाओं पर आधारित हैं। 

2. राजकुमार वेसन्तारा को उनके राज्य से क्यों निकाला गया? 

उत्तर: क्योंकि वे बहुत ही ज्यादा दयालु थे। उन्होंने अपना सबसे कीमती हाथी धर्म के नाम पर दान दे दिया था। 

3. ‘राजकुमार और राजकुमारी’ का चित्र कौन-सी गुफा में बना हुआ है? 

उत्तर: राजकुमार विश्वन्तरा और राजकुमारी माद्री का चित्र अजंता की सत्रहवीं (17वीं) गुफा में बना हुआ है। 

4. ‘राजकुमार और राजकुमारी’ चित्र किस तकनीक से बना है? 

उत्तर: यह चित्र टेम्परा माध्यम में बना है।

पाठगत प्रश्न 12.3

1. ‘मार विजय’ का क्या तात्पर्य है? 

उत्तर: भगवान बुद्ध का अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करना। 

2. ‘मार विजय’ का चित्र किस गुफा में है? 

उत्तर: यह चित्र अजंता की गुफा नंबर 1 में है। 

3. ‘मार विजय’ के चित्र में भगवान बुद्ध किस मुद्रा में हैं? 

उत्तर: भगवान बुद्ध तपस्या करते हुए ‘ध्यान मुद्रा’ में लीन बैठे हैं।

पाठगत प्रश्न 12.4

1. ‘बैलों की लड़ाई’ का चित्र कहाँ स्थित है? 

उत्तर: यह चित्र गुफा संख्या एक (1) के खंभे के ब्रैकेट (कोष्ठक) पर बना है। 

2. ‘बैलों की लड़ाई’ को देखकर क्या प्रभाव पड़ता है? 

उत्तर: अजंता में छत, खंभों, दीवारों एवं मेहराबों पर चित्रण हुआ है (पाठ की उत्तर-कुंजी के अनुसार)। 

3. ‘बैलों की लड़ाई’ एक महत्वपूर्ण चित्र क्यों है? 

उत्तर: क्योंकि यह अजंता के चित्रकारों की कला और कुशलता को दर्शाता है।

पाठांत प्रश्न

1. ‘भित्ति-चित्रण’ किसे कहते हैं? 

उत्तर: दीवार पर की जाने वाली चित्रकारी ‘भित्ति-चित्रण’ (Fresco Painting) कहलाती है। इस पद्धति में दीवार पर पहले आधार (भित्ति) का निर्माण किया जाता है और गीले चूने के प्लास्टर पर केवल पानी या चूनायुक्त पानी में रंगों को मिलाकर चित्रण किया जाता है। जब गीले प्लास्टर से धीरे-धीरे नमी उड़ जाती है, तो चूना हवा के साथ रासायनिक क्रिया करके चित्र की सतह पर ‘कैल्शियम कार्बोनेट’ की एक पतली चमकदार झिल्ली बना देता है। इस प्रक्रिया से चित्र में भरे गए रंग स्थायी हो जाते हैं।

2. ‘मरणासन्न राजकुमारी’ पर एक लेख लिखिए। 

उत्तर: ‘मरणासन्न राजकुमारी’ (The Dying Princess) अजंता की गुफा संख्या 16 का 5वीं सदी का एक अत्यंत प्रसिद्ध चित्र है, जो ‘टेंपरा’ माध्यम में बना है। यह चित्र बुद्ध के भाई नंद की पत्नी ‘सुंदरी’ के अंतिम क्षणों को दर्शाता है, जिसने अपने पति के भिक्षु बन जाने के वियोग में खाना-पीना छोड़ दिया था। चित्र में राजकुमारी एक तख्त के सहारे लेटी हुई है, उसका झुका हुआ सिर, झुकी हुई आँखें, और शिथिल अंग उसकी मृत्यु के करीब होने का संकेत देते हैं। उसकी आँखों से मृत्यु की व्यथा और चेहरे से मृत्यु के आतंक की विषादमय छाया स्पष्ट झलक रही है। राजकुमारी अपने अंतिम क्षणों में अत्यधिक चिंतित परिचारिकाओं (दासियों) से घिरी हुई है। एक दासी ने उसे पकड़ा हुआ है, पीछे खड़ी एक अन्य दासी अपनी छाती पर हाथ रखे है और दूसरे हाथ से पंखा झल रही है, जबकि एक अन्य दासी उसकी नाड़ी देख रही है। इस चित्र में शरीर के नियंत्रित मोड़, हाथों के भावपूर्ण इशारों और आँखों के माध्यम से दुख और करुणा की भावनाओं को बहुत ही कुशलता से व्यक्त किया गया है।

3. गुफा नं. 1 में खंभे पर बने ‘बैलों की लड़ाई’ के चित्र की व्याख्या कीजिए। 

उत्तर: ‘बैलों की लड़ाई’ का चित्र अजंता की गुफा संख्या 1 में एक कोष्ठक (ब्रैकेट) पर 5वीं शताब्दी में टेंपरा माध्यम द्वारा बनाया गया था। यह अजंता के कलाकारों की गतिशीलता दर्शाने वाली कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस चित्र में लड़ने वाले सांडों के शारीरिक बल, पशु शक्ति और उनकी भयंकर आक्रामकता को बहुत ही जीवंत रूप में दर्शाया गया है। चित्र में सांडों का सुडौल शरीर, नुकीले सींग, उठी हुई पूँछ और बड़े कूबड़ उनकी मुख्य पहचान हैं। झुंड के नेता के रूप में एक सांड के सींग बंधे हुए हैं, उसके नथुने आक्रामक रूप से भड़क रहे हैं और वह खुर से भूमि को रगड़ रहा है। चित्रकार ने पशु चित्रण को सजीव बनाने के लिए सांडों को अलग-अलग रंगों में रंगा है और उनकी पूँछ तथा पैरों को विशेष मुद्राओं में चित्रित किया है, जिससे दर्शक सांडों की वास्तविक ‘पशु शक्ति’ को महसूस कर सकें। रेखाओं का प्रवाह इस रचना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता है।

4. भारत की चित्रकला में प्रथम शताब्दी से सातवीं शताब्दी तक गुफा चित्रों के उदाहरण कहाँ-कहाँ उपलब्ध हैं? उल्लेख कीजिए। 

उत्तर: भारत की प्राचीन चित्रकला में प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर सातवीं शताब्दी ईस्वी तक के गुफा चित्रों के उत्कृष्ट उदाहरण मुख्य रूप से जोगीमारा, बाघ, बादामी, सित्तनवासल, अरमामलाई और अजंता की गुफाओं में उपलब्ध हैं। इनमें से अधिकांश भित्ति-चित्रों का मुख्य विषय भगवान बुद्ध का जीवन और उनकी जातक कथाएँ हैं, हालांकि बादामी की गुफाओं में हिंदू धर्म (ब्रह्मणवादी) और सित्तनवासल की गुफाओं में जैन धर्म के विषयों से संबंधित चित्र भी देखने को मिलते हैं।

5. अजंता में बने ‘मार विजय’ नामक चित्र का विवरण लिखिए। 

उत्तर: ‘मार विजय’ अजंता की गुफा संख्या 1 में स्थित 5वीं शताब्दी का एक विशाल और महत्वपूर्ण चित्र है, जो 12 फुट ऊँचा और 8 फुट चौड़ा है। यह चित्र भगवान बुद्ध के निर्वाण प्राप्ति के समीप पहुँचने की घटना से संबंधित है, जब कामदेव (मार) ने उन्हें उनकी तपस्या से डिगाने (भटकाने) का भरपूर प्रयास किया था। इस चित्र में भगवान बुद्ध अद्भुत आंतरिक सौम्यता और शांति के साथ ‘ध्यान-मुद्रा’ में लीन बैठे हैं। बुद्ध को डराने के लिए उनके चारों ओर कई भयानक, क्रूर और कामुक आकृतियाँ चित्रित की गई हैं। चित्र में एक लाल बौना अपनी आँखें फाड़कर उन्हें डराने का प्रयत्न कर रहा है, तो एक भयानक आकृति उन पर तलवार चला रही है। एक ओर एक स्त्री को क्षमा-याचना के रूप में भी चित्रित किया गया है, जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि उसे अपनी गलती का एहसास हो गया है। चित्रकार ने कुरूप और डरावने चेहरों को चित्रित करने में अपनी पैनी दृष्टि का बहुत अच्छा परिचय दिया है।

6. अजंता में बने ‘राजकुमार और राजकुमारी’ नामक चित्र का वर्णन कीजिए। 

उत्तर: ‘राजकुमार और राजकुमारी’ का चित्र अजंता की गुफा संख्या 17 में 6वीं शताब्दी में टेंपरा माध्यम (मिट्टी के प्लास्टर पर प्राकृतिक रंग) में बनाया गया था। यह भित्ति-चित्र जातक कथाओं के दयालु राजकुमार वेसन्तारा (भगवान बुद्ध के पूर्व जन्म) के जीवन के एक दृश्य को दर्शाता है। कहानी के अनुसार, राजकुमार के पास राज्य के लिए शुभ माना जाने वाला एक सफ़ेद हाथी था। जब पड़ोसी राज्य के लोग सूखा पड़ने पर मदद मांगने आए, तो राजकुमार ने बारिश की उम्मीद में उन्हें वह सफेद हाथी दान कर दिया। इस कारण क्रोधित होकर राज्य के लोगों ने राजकुमार को देश निकाला दे दिया था। इस चित्र में राजकुमार वेसन्तारा एक महल के मंडप में अपनी व्याकुल पत्नी (राजकुमारी माद्री) को यही बात बताकर सांत्वना देते हुए नजर आ रहे हैं। इस चित्र की वास्तुकला, चेहरों का शानदार संतुलन, तीखी नज़र, हाथों के इशारे, और शानदार आभूषण व कपड़ों की सजावट अजंता शैली की उत्कृष्ट विशेषताओं को दर्शाती है।

7. चित्र (मरणासन्न राजकुमारी) में राजकुमारी की क्या हालत है? 

उत्तर: ‘मरणासन्न राजकुमारी’ के चित्र में राजकुमारी की हालत बहुत ही दयनीय और चिंताजनक है, जो पूर्ण रूप से आसन्न मृत्यु (करीब आती मौत) की ओर इशारा कर रही है। पति के भिक्षु बन जाने से दुखी राजकुमारी एक तख्त के सहारे लेटी हुई है, उसका सिर और आँखें नीचे की ओर झुकी हुई हैं और शरीर के अंग शिथिल पड़ गए हैं। उसकी आँखों से मृत्यु की व्यथा और चेहरे से मृत्यु के आतंक की स्पष्ट छाया झलक रही है। उसके प्राण निकलने ही वाले हैं, इसलिए उसे एक परिचारिका ने पकड़ रखा है और दूसरी घबराहट में उसकी नाड़ी (पल्स) टटोल रही है।

8. अजंता के भित्ति-चित्रों की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। 

उत्तर: अजंता के भित्ति-चित्रों (दीवार पर बने चित्रों) की कई महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं: 

भावनात्मक गहराई: इन चित्रों में अद्भुत कोमलता है। हाथों की मुद्राएं (भंगिमाएं) और आँखों की चितवन (देखने का तरीका) बहुत ही भावपूर्ण हैं जो भावनाओं का सीधा संचार करती हैं।

सीमित प्राकृतिक रंग: अजंता में केवल गिने-चुने प्राकृतिक और खनिज रंगों का प्रयोग हुआ है, जैसे- खड़िया से बना सफेद रंग, लोहे से बना लाल/भूरा, हरे रंग के लिए टेरावर्ट (ग्लौकोनाइट), और नीले रंग के लिए फारस से मंगवाया गया कीमती पत्थर ‘लैपिस-लाजुली’। रंगों को चावल के मांड के साथ घोला जाता था।

मुख्य विषय: अजंता की अधिकांश गुफाओं के चित्र भगवान बुद्ध के जीवन, जातक कथाओं (बुद्ध के पूर्व जन्म की कहानियों) और उनके आदर्शों पर आधारित हैं।

स्त्रियों का चित्रण: कलाकारों ने स्त्रियों को बहुत ही कोमलता से उकेरा है, उनका शरीर ‘सुकोमल लतिका’ (बेल) के समान लचकदार भंगिमाओं में दिखाया गया है।

स्वतंत्र अभिव्यक्ति: यद्यपि चित्रकारों ने वात्स्यायन के ‘कला के छह अंगों’ का पालन किया, लेकिन उन्होंने खुद को किसी सीमा में नहीं बांधा और अपनी स्वतंत्र कल्पना को सर्वोपरि रखा। यहाँ तक कि सिर्फ सुंदरता ही नहीं, बल्कि डरावने और कुरूप चेहरों (जैसे मार विजय में) को भी बहुत कुशलता से चित्रित किया गया है।

9. ‘मार विजय’ का आकार लिखिए। 

उत्तर: अजंता की गुफा संख्या 1 में स्थित ‘मार विजय’ का यह विशाल चित्र 12 फुट ऊँचा और 8 फुट चौड़ा है।

10. ‘मार विजय’ में बौना क्या करने का प्रयास कर रहा है? 

उत्तर: जब भगवान बुद्ध अपनी निर्वाण प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या में ध्यान-मुद्रा में लीन बैठे थे, तब उन्हें डराने और उनकी तपस्या को भंग करने के लिए ‘मार’ (कामदेव) ने कई आकृतियां भेजी थीं। इसी घटना को दर्शाते हुए चित्र में एक लाल रंग का बौना अपनी आँखें फाड़कर भगवान बुद्ध को डराने का निरंतर प्रयास कर रहा है, ताकि उनका ध्यान भंग हो सके।

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