NIOS Class 12 Painting Chapter 24 आदिवासी एवं लोककला के संदर्भ में सृजनात्मक डिजाइन

NIOS Class 12 Painting Chapter 24 आदिवासी एवं लोककला के संदर्भ में सृजनात्मक डिजाइन Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 12 Painting Chapter 24 आदिवासी एवं लोककला के संदर्भ में सृजनात्मक डिजाइन Notes and select need one. NIOS Class 12 Painting Chapter 24 आदिवासी एवं लोककला के संदर्भ में सृजनात्मक डिजाइन Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 12 Painting Paper Code: 332.

NIOS Class 12 Painting Chapter 24 आदिवासी एवं लोककला के संदर्भ में सृजनात्मक डिजाइन

Also, you can read the NIOS book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per National Institute of Open Schooling (NIOS) Book guidelines. These solutions are part of NIOS All Subject Solutions. Here we have given NIOS Class 12 Painting Hindi Medium Solutions, NIOS Senior Secondary Course Painting Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 24

Part – 2: प्रयोगात्मक
पाठगत प्रश्न

1. दोहरी बाह्य रेखाएँ, हाशिए एवं मिट्टी के रंगों का प्रयोग करते हुए, मधुबनी चित्र शैली का एक सामान्य नमूना चुनकर उसे ड्राइंग शीट पर चित्रित करें।

उत्तर: 

2. भील कला के दिए गए पशु-पक्षी आकृतियों के नमूने से एक चित्र संयोजन तैयार करें एवं उसमें भील चित्रों की तकनीक के अनुसार रंगाकन करें।

उत्तर: 

3. ड्राइंग शीट पर सीधी रेखाओं की सहायता से एक कोलम बनाएँ।

उत्तर:

4. परम्परागत तकनीक का प्रयोग करते हुए, भूमि पर एक कोलम चित्र बनाएँ।

उत्तर: 

5. मधुबनी चित्रों में सामान्यतः चित्रित की जाने वाली विषय-वस्तु एवं आकल्पनों को सूचीबद्ध करें।

उत्तर: मधुबनी (या मिथिला) चित्रों के मुख्य विषय और आकल्पन (motifs) निम्नलिखित हैं:

मुख्य विषय-वस्तु: इनमें सबसे अधिक हिंदू देवी-देवताओं के चित्र बनाए जाते हैं, जिनमें कृष्ण, शिव, दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, सूर्य और चंद्र प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त तुलसी का पौधा, विवाह के दृश्य और उनके आस-पास हो रही घटनाएँ भी चित्रित की जाती हैं।

प्रमुख आकल्पन एवं प्रतीक: मानव आकृतियाँ, पक्षी, हाशिए (बॉर्डर), मछली, सूर्य देव, पुष्प आकार और वृक्ष। इन चित्रों में कोई भी स्थान खाली नहीं छोड़ा जाता है; रिक्त स्थानों को फूल-पत्तियों और पशु-पक्षियों की आकृतियों से भर दिया जाता है।

अतिरिक्त प्रश्न उत्तर

1. मधुबनी (मिथिला) चित्रकला का आरंभ कब और किस ऐतिहासिक घटना से जुड़ा माना जाता है? 

उत्तर: ऐसी मान्यता है कि मधुबनी (जिसे मिथिला चित्र भी कहा जाता है) चित्रकला का आरंभ रामायण काल में हुआ था। ऐसा माना जाता है कि राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के शुभ अवसर पर अपनी प्रजा से अपने घरों की दीवारों और आँगनों को चित्रित करने के लिए कहा था, वहीं से इस कला की शुरुआत हुई।

2. भील चित्रकला (पिठौरा) में रंग और ब्रश कैसे तैयार किए जाते हैं, और इन चित्रों में घोड़े का क्या महत्व है? 

उत्तर: भील कला में चित्रकारी के लिए रंग फूल-पत्तियों जैसे प्राकृतिक साधनों से प्राप्त किए जाते हैं और ब्रश नीम की टहनी से बनाए जाते हैं। पिठौरा कला में घोड़े का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि भील जनजाति का यह अटूट विश्वास है कि उनके देवी-देवता घोड़े पर ही सवारी करते हैं, इसलिए वे पिठौरा के घोड़े को अत्यंत शुभ प्रतीक मानकर चित्रित करते हैं।

3. कोलम चित्रकला में बिंदुओं (पुल्ली) और उन्हें जोड़ने वाली रेखाओं का दार्शनिक/प्रतीकात्मक अर्थ क्या है? 

उत्तर: कोलम चित्रों में बनाए जाने वाले बिंदुओं को ‘पुल्ली’ कहा जाता है। दक्षिण भारत की इस कला में एक गहरा दार्शनिक अर्थ छिपा है। यह विश्वास किया जाता है कि कोलम में बनाए गए बिंदु (पुल्ली) हमारे जीवन में आने वाली चुनौतियों के प्रतीक हैं, और इन बिंदुओं के आस-पास घूमती हुई रेखाएँ हमारी जीवन यात्रा को दर्शाती हैं।

4. पारंपरिक रूप से कोलम बनाने के लिए ‘चावल के आटे’ का ही प्रयोग क्यों किया जाता है? 

उत्तर: पारंपरिक रूप से कोलम चावल के मोटे पिसे आटे से बनाए जाते हैं ताकि चींटियों, पक्षियों और अन्य छोटे जीवों को भोजन मिल सके और उन्हें भोजन की तलाश में दूर न जाना पड़े। चावल का यह आटा जीवों को घर की ओर आमंत्रित करता है, जो प्रकृति में समरसता पूर्ण सह-अस्तित्व (co-existence) की महान भावना को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, इसे घर में लक्ष्मी के आगमन और बुरी आत्माओं को दूर रखने का प्रतीक भी माना जाता है।

5. मधुबनी और भील कला की ‘रंग भरने और रेखांकन’ की तकनीक में मुख्य क्या अंतर है? 

उत्तर: मधुबनी चित्रकला: इसमें रंग बिल्कुल सपाट (flat) भरे जाते हैं और किसी प्रकार की शेडिंग नहीं की जाती। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी दोहरी बाहरी रेखाएँ (double outlines) हैं। इन दोहरी रेखाओं के बीच के खाली स्थान को क्रॉस या छोटी-छोटी सीधी रेखाओं से भर दिया जाता है।

भील चित्रकला: इसमें भी सपाट रंग भरे जाते हैं (जैसे लाल, हरा, नारंगी), लेकिन रंग भरने के बाद आकृतियों की रेखाओं और खाली जगहों पर समान आकार के रंग-बिरंगे बिंदु (सफेद, हरे, नीले, पीले आदि) अंकित किए जाते हैं। यह बिंदु वाली तकनीक (dot pattern) भील कला की खास पहचान है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top