NIOS Class 12 Painting Chapter 20 पोस्टर निर्माण Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 12 Painting Chapter 20 पोस्टर निर्माण Notes and select need one. NIOS Class 12 Painting Chapter 20 पोस्टर निर्माण Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 12 Painting Paper Code: 332.
NIOS Class 12 Painting Chapter 20 पोस्टर निर्माण
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पोस्टर निर्माण
Chapter: 20
| Part – 2: प्रयोगात्मक |
| पाठगत प्रश्न |
1. एक ही रूपरेखा में रंग भरें। जब भी समय हो एक विषय पर आधारित रूपरेखा बनाएँ (विभिन्न रंगत में)। अपनी रूपरेखा में रंगों के प्रभाव को देखें।
उत्तर:

निष्कर्ष – एक ही रूपरेखा में विभिन्न रंग भरने से चित्र का प्रभाव बदल जाता है। रंगों के सही चयन और संयोजन से चित्र अधिक आकर्षक और अर्थपूर्ण बनता है।
2: पोस्टर बनाने की प्रक्रिया के कौन से तीन मुख्य लक्ष्य हैं?
उत्तर: पोस्टर बनाने की प्रक्रिया के तीन मुख्य लक्ष्य निम्नलिखित हैं:
(i) अपने संदेश को जनता तक संप्रेषित (Communicate) करना।
(ii) अपनी संकल्पनाओं (Concepts) को विज्ञापित करना।
(iii) जनता को किसी विशेष समस्या के प्रति संवेदनशील (Sensitize) बनाना।
3. एक आदर्श पोस्टर में कौन से छह (6) गुण होने चाहिए?
उत्तर: एक आदर्श पोस्टर में निम्नलिखित छह गुण होने चाहिए:
(i) रचनात्मक अवधारणा (Creative concept)।
(ii) चटक रंग तथा रंगों का प्रतीकात्मक उपयोग।
(iii) आकर्षक शीर्षक।
(iv) जहाँ आवश्यक हो वहाँ तुकबंदी पूर्ण उप-शीर्षक।
(v) स्पष्ट आकार।
(vi) आकर्षक रूपरेखा (Layout)
4. पोस्टर के लिए (रचनात्मक होना और ध्यान आकर्षित करना) इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर: पोस्टर का मुख्य लक्ष्य ही जनता का ध्यान आकर्षित करना होता है। जब पोस्टर रचनात्मक होता है और लोगों का ध्यान खींचता है, तभी हम जो संदेश संप्रेषित करना चाहते हैं, उसका लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सही जानकारी और आकर्षक रूपरेखा के माध्यम से ही पोस्टर अपना प्रभाव बनाए रखने में सफल होता है।
5. पोस्टर बनाने की प्रक्रिया में संकल्पना इतना महत्वपूर्ण भाग क्यों है?
उत्तर: संकल्पना (Concept) इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के आधार पर पूरी विचार प्रक्रिया घूमती है। एक अच्छी संकल्पना के माध्यम से ही हम समाज के विकास में योगदान दे सकते हैं और किसी संकट से निपटने के लिए सक्रिय जनजागरण अभियान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं।
6. पोस्टर की रूपरेखा बनाने के काम में क्या संतुलन है?
उत्तर: पोस्टर निर्माण में ‘संतुलन’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण कसौटी है। एक अच्छे पोस्टर में निम्नलिखित तत्वों के बीच सही संतुलन होना चाहिए:
(i) रंग तथा रूपरेखा (Color and Layout)
(ii) रूप तथा अक्षर/सुलेखन (Form and Calligraphy)
(iii) शीर्षक और उप-शीर्षक (Title and Sub-title)
(iv) आवृत स्थान (Occupied space) तथा निष्क्रिय स्थान (Empty/Passive space)।
7. पोस्टर में लिखने के दौरान आप कुर्सी डिजाइन के लिए कोई भी आकार तथा शीर्षक का प्रकार चुन सकते हैं। एक अच्छा तरीका यह भी है कि शब्दों को काटकर विभिन्न आकार में दूसरे कागज पर लगाएँ। इन शब्दों को व्यवस्थित रूप से दूसरे कागज पर लगाकर फिर रूपरेखा पर आकार के प्रभाव को देखें।
उत्तर: (व्यावहारिक अभ्यास): इस कार्य में आपको अक्षरों (Typography/Calligraphy) के साथ प्रयोग करना है:
(i) पोस्टर के शीर्षक और उप-शीर्षक के लिए पुराने अखबारों, पत्रिकाओं या रंगीन कागज़ों से अलग-अलग आकार के शब्दों को काटें।
(ii) इन कटे हुए शब्दों को एक नए कागज़ पर अलग-अलग तरीकों से व्यवस्थित करके चिपकाएँ।
(iii) ऐसा करने से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि अक्षरों के आकार, प्रकार और उनकी जगह (Placement) का पोस्टर की पूरी रूपरेखा पर कितना और कैसा प्रभाव पड़ता है।
| अतिरिक्त प्रश्न उत्तर |
1. पोस्टर क्या है और इसका मुख्य रूप से उपयोग किनके द्वारा किया जाता है?
उत्तर: पोस्टर सूचना देने वाला एक कागज होता है, जिसे दीवार या सतह पर लगाया जाता है ताकि लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके। इसका उपयोग मुख्य रूप से विज्ञापनदाताओं (Advertising agencies), प्रचारकों, प्रदर्शनकारियों तथा अन्य समूहों द्वारा जनता के साथ संवाद स्थापित करने के लिए किया जाता है।
2. यूरोप में पोस्टर कला का जनक किन्हें माना जाता है और उन्होंने क्या किया?
उत्तर: सन 1880 के दशक में यूरोप में पोस्टर तकनीक फैली। ‘हेनरी-द-टॉलेस-लॉट्रेसी’ और ‘ज्यूल्स चेरेट’ को विज्ञापन पोस्टर का जनक माना गया। ये पेंसिल चित्रकार थे जिन्होंने 1886 में पेरिस में एक छोटा लिथोग्राफी (अश्ममुद्रण) कार्यालय स्थापित किया और एक नई तकनीक विकसित की जिसमें रंगों को जोड़कर पोस्टर को अधिक प्रभावी बनाया गया।
3. भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (विद्रोह) के दौरान पोस्टर का उपयोग कैसे किया गया?
उत्तर: भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान चित्रों का उपयोग पोस्टर के रूप में किया गया था। अवनिन्द्रनाथ टैगोर, नंदलाल बोस और विनोद बिहारी मुखर्जी जैसे कलाकारों ने भारतीय लोगों में उनकी सांस्कृतिक विरासत की जागरूकता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उदाहरण के लिए, नंदलाल बोस के बनाए चित्रों का उपयोग ‘हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन’ के पोस्टर के रूप में किया गया था।
4. एक पोस्टर का नक्शा (Layout/Design) तैयार करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर: पोस्टर का नक्शा तैयार करते समय सबसे पहले विषय से संबंधित सभी प्रासंगिक जानकारी एकत्रित करनी चाहिए। उसके बाद उन मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो अधिक लोकप्रिय हों। शीर्षक के लिए उपयुक्त रूपों और भिन्न-भिन्न रंगों का चयन करना चाहिए। यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि न तो लिखावट (Text) रूपरेखा (Design) पर भारी पड़े और न ही रूपरेखा लिखावट पर।
5. पोस्टर निर्माण के लिए किन-किन आवश्यक सामग्रियों (Materials) की आवश्यकता होती है?
उत्तर: पोस्टर बनाने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होती है: चित्रकारी बोर्ड और पिन, चित्रकारी हेतु कागज (कार्ट्रिज, खड़िया, चार्ट), पेन्सिल (HB, 2B, 4B), रबर, पोस्टर रंग, तूलिका (Brush – गोल और समतल दोनों), पैमाना (Scale), मार्कर।

