NIOS Class 12 Political Science Chapter 12 भारत का सर्वोच्च न्यायालय

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NIOS Class 12 Political Science Chapter 12 भारत का सर्वोच्च न्यायालय

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Chapter: 12

मॉड्यूल – 3 सरकार की संरचना

पाठगत प्रश्न 12.1

1. रिक्त स्थान भरिए-

(क) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति _______________ करता है। (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विधि मंत्रालय)

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

(ख) सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित _______________ न्यायाधीश होते हैं। (23/25/30)

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित 30 न्यायाधीश होते हैं।

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(ग) सर्वोच्च न्यालय के न्यायाधीश _______________ वर्ष की आयु के पश्चात सेवानिवृत हो जाते हैं। (60/62/65)

उत्तर: सर्वोच्च न्यालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु के पश्चात सेवानिवृत हो जाते हैं।

(घ) ______________ के क्षेत्र में विशिष्ट ख्याति प्राप्त किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त कर सकता है। (शिक्षा/कानून/राजनीति)

उत्तर: कानून के क्षेत्र में विशिष्ट ख्याति प्राप्त किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त कर सकता है।

पाठगत प्रश्न 12.2

1. रिक्त स्थान भरिए-

(क) सर्वोच्च न्यायालय में दो या दो से अधिक राज्यों के बीच झगड़े का मामला इसके ______________ न्यायक्षेत्र के अंतर्गत आता है। (प्रारम्भिक, अपील संबंधी, मंत्रणा संबंधी)

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय में दो या दो से अधिक राज्यों के बीच झगड़े का मामला इसके प्रारम्भिक न्यायक्षेत्र के अंतर्गत आता है।

(ख) सर्वोच्च न्यायालय राष्ट्रपति को परामर्श देने के लिए ________________ (बाध्य है, बाध्य नहीं हैं)।

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय राष्ट्रपति को परामर्श देने के लिए बाध्य नहीं हैं। 

(ग) भारत के संविधान की व्याख्या करने की अंतिम शक्ति ________________ के पास है। (उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय, अथवा सेशन न्यायालय)

उत्तर: भारत के संविधान की व्याख्या करने की अंतिम शक्ति सर्वोच्च न्यायालय के पास है।

पाठगत प्रश्न 12.3

(क) न्यायिक पुनरावलोकन किसे कहते हैं?

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय की किसी कानून की संवैधानिक वैधता परखने की शक्ति।

(ख) जनहित याचिका से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जनहित के मामलों की सुनवाई है।

(ग) सर्वोच्च न्यायालय की कौन-सी शक्ति मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं?

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक पुनरावलोकन शक्ति मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।

पाठांत प्रश्न

1. सर्वोच्च न्यायालय की रचना तथा गठन का वर्णन कीजिए।

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय भारत का सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकरण है। इसकी स्थापना के समय इसमें एक मुख्य न्यायाधीश और सात अन्य न्यायाधीश थे, परंतु समय-समय पर संसद ने न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई है। वर्तमान में इसमें मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त 30 न्यायाधीश होते हैं और आवश्यकता पड़ने पर संसद इस संख्या में वृद्धि कर सकती है।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, लेकिन 1993 और 1999 की सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के निर्णयों के अनुसार राष्ट्रपति को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले कलीजियम की सलाह मानना अनिवार्य हो गया है। कलीजियम में मुख्य न्यायाधीश सहित चार वरिष्ठ न्यायाधीश होते हैं, जो रिक्त पदों के लिए योग्य नामों की सिफारिश करते हैं। इस प्रकार नियुक्ति की वास्तविक शक्ति कलीजियम के पास है जबकि राष्ट्रपति की भूमिका औपचारिक होती है।

न्यायाधीश बनने के लिए व्यक्ति भारतीय नागरिक होना चाहिए और निम्न में से किसी एक योग्यता को पूरा करना चाहिए—

(i) कम से कम पाँच वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो।

(ii) कम से कम दस वर्ष तक उच्च न्यायालय में वकालत की हो, या।

(iii) राष्ट्रपति की दृष्टि में प्रख्यात न्यायविद् हो।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रहते हैं। उन्हें असक्षमता या कदाचार के आधार पर ही हटाया जा सकता है, वह भी तब जब संसद के दोनों सदन 2/3 बहुमत से अलग-अलग प्रस्ताव पारित करें। अब तक किसी न्यायाधीश को इस प्रक्रिया द्वारा पदच्युत नहीं किया जा सका है।

2. सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को कैसे अपदस्थ किया जा सकता है?

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को केवल असाधारण परिस्थितियों में ही अपदस्थ किया जा सकता है। न्यायाधीश को हटाने का आधार असक्षमता (Incapacity) या कदाचार (Misbehaviour) होता है। हटाने की प्रक्रिया अत्यंत कठोर है ताकि न्यायाधीशों की स्वतंत्रता और कार्यकाल सुरक्षित रहे।

न्यायाधीश को अपदस्थ करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है—

(i) संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा को अलग-अलग एक प्रस्ताव पारित करना होता है।

(ii) यह प्रस्ताव उसी सत्र में उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के कुल 2/3 बहुमत से पारित होना चाहिए।

(ii) दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव पारित होने के बाद ही राष्ट्रपति उस न्यायाधीश को पद से हटाते हैं।

3. सर्वोच्च न्यायालय के प्रारम्भिक तथा अपील संबंधी न्यायक्षेत्र की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: (i) प्रारम्भिक (मूल) न्यायक्षेत्र: कुछ मामलों की सुनवाई सीधे सर्वोच्च न्यायालय में ही शुरू होती है। ऐसे मामलों को किसी अन्य अदालत में नहीं ले जाया जा सकता।

इनमें मुख्यतः—

(क) केन्द्र सरकार और एक या अधिक राज्य सरकारों के बीच विवाद।

(ख) दो या दो से अधिक राज्यों के बीच विवाद।

(ग) मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का अधिकार।

(घ) जनहित याचिकाएँ (PIL), जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय अपने विशेष अधिकार के तहत स्वीकार करता है।

(ङ) इन मामलों में सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार सर्वोच्च और अनिवार्य माना जाता है।

(ii) अपील संबंधी न्यायक्षेत्र: सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनता है।

इसका अपील संबंधी अधिकार क्षेत्र बहुत व्यापक है, जिसमें तीन प्रकार के मामले आते हैं—

(i) दीवानी मामले: यदि किसी दीवानी मामले में कोई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न हो जिसकी सही व्याख्या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आवश्यक हो, तो उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध अपील की जा सकती है।

(ii) फौजदारी मामले: यदि उच्च न्यायालय किसी व्यक्ति को मृत्यु दंड दे दे, या निचली अदालत के निर्णय को बदलकर कठोर दंड दे, तो ऐसी स्थिति में अपील का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय को होता है। कई मामलों में उच्च न्यायालय का प्रमाणपत्र आवश्यक होता है, पर कुछ गंभीर मामलों में बिना प्रमाणपत्र के भी अपील की जा सकती है।

(iii) संवैधानिक मामले: ऐसे मामले जिनमें संविधान की व्याख्या जरूरी हो, विशेषकर मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों में अपील की जा सकती है। यदि उच्च न्यायालय प्रमाणपत्र न दे, तो सर्वोच्च न्यायालय विशेष अनुमति के आधार पर अपील सुन सकता है।

4. “सर्वोच्च न्यायालय भारतीय संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक है।” व्याख्या कीजिए।

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय को भारतीय संविधान का व्याख्याता और सर्वोच्च संरक्षक माना जाता है। संविधान देश का सर्वोच्च कानून है, इसलिए यह न्यायालय कार्यपालिका और विधायिका को इसके किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करने देता। यदि सरकार का कोई कार्य या कानून मौलिक अधिकारों का हनन करता है, तो सर्वोच्च न्यायालय न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति का उपयोग करके उसे असंवैधानिक या अवैध घोषित कर सकता है। इसी कारण इसे संविधान का संरक्षक कहा जाता है।

सर्वोच्च न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए विभिन्न प्रकार की रिट जैसे— हैबियस कॉर्पस, मण्डामस, प्रोहिबिशन, सर्टियोरारी, क्वो-वॉरंटो जारी कर सकता है। ये आदेश निचली अदालतों और अधिकारियों को दिए जाते हैं ताकि नागरिकों के उल्लंघित अधिकारों को वापस दिलाया जा सके। यदि किसी कानून द्वारा मौलिक अधिकारों का हनन होता है, तो सर्वोच्च न्यायालय उसे रद्द कर सकता है। इसने कई ऐसे कानून असंवैधानिक घोषित किए हैं जो नागरिकों के अधिकारों के खिलाफ थे।

इसके अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णयों पर पुनर्विचार करने का भी अधिकार है। यदि नए तथ्य सामने आएं या किसी निर्णय में त्रुटि दिखाई दे, तो यह अपनी ही पीठ के पूर्व निर्णय को बदल सकता है।

5. हमारे दैनिक जीवन में जनहित याचिकाओं के महत्व की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: जनहित याचिका (PIL) हमारे दैनिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि इसके माध्यम से कोई भी नागरिक चाहे वह सीधे प्रभावित न भी हो समाज के हित में न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकता है। पहले न्यायालय केवल उन्हीं के मामलों को सुनता था जो प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होते थे, लेकिन PIL की शुरुआत के बाद समाज के कमजोर और वंचित वर्ग तक न्याय सुगमता से पहुँचने लगा है।

PIL के कारण—

(i) निर्धन, कमजोर और शोषित लोगों के अधिकारों की रक्षा संभव हो पाई है।

(ii) अवैध रूप से बंदी बनाए गए लोगों को रिहाई मिली और उनके व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को सुरक्षा मिली।

(iii) बंधुआ मजदूरों, जनजातियों, झुग्गीवासियों, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा हेतु न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

(iv) पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए न्यायालय ने कई शहरों में प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को बंद कराया, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा हुई।

(v) किसी भी व्यक्ति द्वारा भेजे गए सरल पत्र तक को न्यायालय PIL मानकर सुन सकता है, जिससे न्याय और अधिक सुलभ बन गया है।

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