NIOS Class 12 Economics Chapter 14 उपभोक्ता का संतुलन

NIOS Class 12 Economics Chapter 14 उपभोक्ता का संतुलन Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 12 Economics Chapter 14 उपभोक्ता का संतुलन Notes and select need one. NIOS Class 12 Economics Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 12 Economics Notes Paper 318.

NIOS Class 12 Economics Chapter 14 उपभोक्ता का संतुलन

Also, you can read the NIOS book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per National Institute of Open Schooling (NIOS) Book guidelines. These solutions are part of NIOS All Subject Solutions. Here we have given NIOS Class 12 Economics Hindi Medium Solutions, NIOS Senior Secondary Course Economics Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 14

पाठगत प्रश्न 14 .1

1. उपभोक्ता के संतुलन से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जब कोई उपभोक्ता अपनी सीमित आय (आय का बजट) से खरीदी गई वस्तुओं के उपभोग से अधिकतम संतोष (कुल उपयोगिता) प्राप्त करता है तथा उससे कम या अधिक मात्रा खरीदने पर उसकी उपयोगिता घटने लगती है, तब उपभोक्ता संतुलन में कहा जाता है। अर्थात् वह वस्तु-उपभोग में कोई परिवर्तन करना नहीं चाहता।

2. निम्नलिखित की परिभाषा दीजिए-

(i) उपयोगिता।

उत्तर: किसी वस्तु के उपभोग से प्राप्त संतोष को उपयोगिता कहते हैं। यह वस्तुओं की वह शक्ति है जो मानव की इच्छाओं को संतुष्ट करती है।

(ii) सीमांत उपयोगिता।

उत्तर: किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के उपभोग से प्राप्त अतिरिक्त संतोष को सीमांत उपयोगिता कहते हैं।

(iii) कुल उपयोगिता।

उत्तर: किसी वस्तु की सभी उपभोग की गई इकाइयों से प्राप्त कुल संतोष को कुल उपयोगिता कहते हैं।

3. ह्रासमान सीमांत उपयोगिता के नियम का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: इस नियम के अनुसार, जैसे-जैसे उपभोक्ता किसी वस्तु की अधिक इकाइयाँ उपभोग करता है, उसकी प्रत्येक अगली इकाई से प्राप्त सीमांत उपयोगिता घटती जाती है। अंत में एक स्तर पर सीमांत उपयोगिता शून्य या ऋणात्मक भी हो सकती है।

4. कुल उपयोगिता कितनी होगी, जब सीमांत उपयोगिता शून्य है?

उत्तर: जब सीमांत उपयोगिता शून्य होती है, तब कुल उपयोगिता अधिकतम होती है।

पाठगत प्रश्न 14.2

1. एक वस्तु की दशा में उपभोक्ता के संतुलन की आवश्यक शर्तों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: उपयोगिता विधि के अनुसार एक वस्तु की दशा में उपभोक्ता तब संतुलन में होता है जब –

(क) वस्तु की सीमांत उपयोगिता (MU) = वस्तु की कीमत (P)। अर्थात् MU = P.

(ख) उपभोक्ता की सीमांत उपयोगिता घटती हुई होनी चाहिए।

(ग) MU = P होने के बाद उपभोक्ता को आगे उपभोग बढ़ाने से सीमांत उपयोगिता कीमत से कम हो जाएगी।

2. दो वस्तुओं की दशा में उपभोक्ता के संतुलन की आवश्यक शर्तों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: उपभोक्ता तब संतुलन में होगा जब –

(क) 𝑀𝑈𝑥/𝑃𝑥=𝑀𝑈𝑦/𝑃𝑦.

(ख) दोनों वस्तुओं की सीमांत उपयोगिता घटती हुई हो।

(ग) उपभोक्ता का पूरा बजट (आय) वस्तुओं पर खर्च हो जाए।

(घ) किसी एक वस्तु का उपभोग बदलने से संतुलन बिगड़ जाए।

पाठगत प्रश्न 14.3

1. अनधिमान वक्र क्या होता है?

उत्तर: अनधिमान वक्र वह वक्र है जो दो वस्तुओं के ऐसे विभिन्न संयोजन दर्शाता है जिनसे उपभोक्ता को समान संतोष प्राप्त होता है।

2. प्रतिस्थापन की सीमांत दर की परिभाषा दीजिए।

उत्तर: वह दर जिस पर उपभोक्ता बिना कुल उपयोगिता बदले, एक वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई पाने के लिए दूसरी वस्तु की कितनी मात्रा छोड़ने को तैयार है, उसे सीमांत प्रतिस्थापन दर (MRS) कहते हैं।

3. एकदिष्ट अधिमान से आपका क्या अभिप्राय है? उदाहरण दीजिए।

उत्तर: एकदिष्ट अधिमान का अर्थ है कि उपभोक्ता हमेशा किसी भी वस्तु की अधिक मात्रा को कम मात्रा की अपेक्षा पसंद करता है।

उदाहरण: उपभोक्ता 2X + 2Y को 1X + 2Y या 2X + 1Y से अधिक पसंद करेगा।

4. अनधिमान वक्र विधि द्वारा उपभोक्ता के संतुलन की शर्तों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: उपभोक्ता तब संतुलन में होता है जब –

(क) उसकी बजट रेखा अनधिमान वक्र को स्पर्श (tangent) करे।

(ख) MRS = Px/Py.

(ग) स्पर्श बिंदु पर अनधिमान वक्र उच्चतम संभव होना चाहिए।

(घ) बजट रेखा उपभोक्ता की आय के अनुरूप हो।

पाठांत प्रश्न

1. उपभोक्ता के संतुलन से क्या अभिप्राय है? उपयोगिता विधि का प्रयोग करते हुए एक वस्तु की दशा में उपभोक्ता के संतुलन की शर्तों को समझाइए।

उत्तर: उपभोक्ता का संतुलन वह अवस्था है जिसमें उपभोक्ता अपनी सीमित आय से वस्तुओं के उपभोग द्वारा अधिकतम संतोष प्राप्त करता है और अब उपभोग में कोई परिवर्तन नहीं करना चाहता।

एक वस्तु की दशा में संतुलन की शर्तें (Utility Approach)।

उपभोक्ता एक वस्तु की दशा में तभी संतुलन में होता है जब –

(क) सीमांत उपयोगिता (MU) = वस्तु की कीमत (P).

अर्थात्: 𝑀𝑈=𝑃.

(ख) सीमांत उपयोगिता घटती हुई होनी चाहिए।

(ग) जब MU = P हो जाए, उसके बाद उपभोक्ता यदि और मात्रा खरीदेगा तो – 𝑀𝑈<𝑃.

(घ) हो जाएगा, जिससे कुल संतोष (TU) घटेगा, इसलिए उपभोक्ता उसी बिंदु पर ठहर जाता है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top