UP Board Class 12 Computer Chapter 17 डाटाबेस कन्सेप्ट

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UP Board Class 12 Computer Chapter 17 डाटाबेस कन्सेप्ट

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Chapter: 17

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

1. डाटाबेस शब्द का अर्थ समझाइए।

अथवा

DBMS का पूर्ण रूप लिखिए।

उत्तर: किसी कार्य विशेष से सम्बन्धित सूचनाओं तथा डाटा का व्यवस्थित रूप से एकत्रीकरण ही डाटाबेस कहलाता है। DBMS को पूर्ण रूप डाटाबेस मैनेजमेण्ट सिस्टम है।

2. DBMS की व्याख्या संक्षेप में कीजिए।

उत्तर: डाटाबेस मैनेजमेण्ट सिस्टम प्रोग्राम का एक ऐसा समूह है, जो डाटाबेस को परिभाषित करने, क्रिएट करने व व्यवस्थित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

3. RDBMS की एक वाक्य में व्याख्या कीजिए।

उत्तर: रिलेशनल डाटाबेस के रख-रखाव के तरीके को रिलेशनल डाटाबेस मैनेजमेण्ट सिस्टम (RDBMS) कहा जाता है।

4. रिलेशनल डाटाबेस तन्त्र के गुणों को समझाइए।

उत्तर: रिलेशनल डाटाबेस तत्र में निम्न गुण पाए जाते हैं-

(i) प्रत्येक टेबल के सभी रिकॉर्ड्स के फिल्ड संख्या एक समान होना चाहिए।

(ii) प्रत्येक फाइल में एक ही प्रकार के रिकॉर्ड होते हैं।

5. नॉर्मलाइजेशन शब्द को समझाइए।

उत्तर: रिलेशनल मॉडल के अन्तर्गत नॉर्मलाइजेशन का अर्थ है-डाटाबेस में होने वाली पुनरावृत्ति को कम करना।

6. SQL का विकास समय बताइए।

उत्तर: SQL का विकास 1970 के दशक में डॉ. ई.एफ. कोड ने किया था।

7. फाइल में लिखने के लिए SQL के किन्हीं दो स्टेटमेण्ट को समझाइट।

उत्तर: (i) DELETE: इस कमाण्ड का प्रयोग किसी टेबल से अवांछित रॉज अथवा रिकॉर्ड्स को डिलीट करने के लिए किया जाता है।

(ii) INSERT: किसी टेबल को क्रिएट करने के पश्चात् उस टेबल में डाटा-रिकॉड्र्स को एण्टर करने के लिए INSERT कमाण्ड का प्रयोग होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न ।

1. डाटाबेस मैनेजमेण्ट सिस्टम क्या है? इनके मुख्य उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: डाटाबेस मैनेजमेण्ट सिस्टम: प्रोग्राम का एक ऐसा समूह है, जो डाटाबेस परिभाषित करने, क्रिएट करने तथा मेण्टेन करने के लिए यूजर को योग्य बनाता है। यह उपयोगकर्ता को एक ऐसा वातावरण प्रदान करती है, जिसके माध्यम से डाटा को संग्रहीत करना तथा पुन: प्राप्त करना बहुत ही सुविधाजनक हो जाता है।

डाटाबेस मैनेजमेण्ट सिस्टम के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

(i) इसका मूल उद्देश्य प्रयोगकर्ता और डाटाबेस के मध्य एक ऐसा दक्ष और सुविधाजनक वातावरण बनाना है, जिसमें डाटाबेस और प्रयोगकर्ता के मध्य डाटा का आदान-प्रदान सरलता से हो सके।

(ii) इसका दूसरा उद्देश्य डाटाबेस के प्रयोगकर्ताओं की जानकारियों का तथा उनके द्वारा की जाने वाली डाटाबेस क्रियाओं का प्रबन्धन करना है।

2. रिलेशनल डाटाबेस सिस्टम का वर्णन कीजिए।

उत्तर: रिलेशनल डाटाबेस में डाटा को द्वि-आयामी सारणियों (Two-dimensional tables) के रूप में संग्रहीत किया जाता है। इन सारणियों को रिलेशन भी कहा जाता है। रिलेशन डाटाबेस के रख रखाव के लिए रिलेशनल डाटाबेस मैनेजमेण्ट सिस्टम (RDBMS) की आवश्यकता होती है। RDBMS, DBMS का ही एक प्रकार हैं। रिलेशनल डाटाबेस की मुख्य विशेषता यह है कि एकल डाटाबेस में एक-से-अधिक सारणियों को संग्रहीत किया जा सकता है और ये सारणियाँ आपस में सम्बन्धित होती हैं।

3. फंक्शनल डिपेण्डेन्सी पर संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर: किसी टेबल का फील्ड A, फील्ड B पर तब फंक्शनली डिपेण्डेण्ट होता है, जब फील्ड A के समस्त मान फील्ड B में उपस्थित हो। इसे हम → (ऐरो सिम्बल) से प्रदर्शित करते हैं।

जैसे- B ← A

4. निम्नलिखित SQL क्वेरी के उदाहरण दीजिए।

(i) Create.

(ii) Select.

(iii) Delete.

(iv) Update.

Student यहाँ टेबल का नाम है।

उत्तर: (i) CREATE TABLE Student (Roll_NO int (5),

(ii) SELECT * FROM Student;

उपरोक्त क्वेरी से Student टेबल का सारा डाटा रिट्रीव किया जाता है।

SELECT Name FROM Student;

उपरोक्त क्वेरी से किसी एक विशेष प्रकार का डाटा रिट्रीव किया जाता है।

(iii) DELETE Student;

(iv) UPDATE Student SET Name =”Shikha” WHERE Roll_No = 1;

5. DBMS व RDBMS में बीच कोई दो अन्तर बताइए।

उत्तर: DBMS व RDBMS के बीच अन्तर निम्न प्रकार है-

DBMSRDBMS
DBMS डेटा संग्रह फाइल के रूप में करता है।RDBMS डेटा को एक सारणीबद्ध रूप में संग्रहीत करते हैं।
Normalization DBMS में उपलब्ध नहीं है।Normalization RDBMS में उपलब्ध है

लघु उत्तरीय प्रश्न ।।

1. डाटाबेस से आप क्या समझते हैं?

अथवा

डाटाबेस की अवधारणा तथा सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।

अथवा

डाटाबेस क्या है? उनके गुणों व अवगुणों का वर्णन कीजिए।

अथवा

DBMS की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: किसी कार्य विशेष से सम्बन्धित सूचनाओं/डाटा का व्यवस्थित रूप से एकत्रीकरण ही डाटाबेस कहलाता है। डाटाबेस डाटा फाइल्स का एक ऐसा समूह है, जो एकीकृत फाइल सिस्टम (Integrated file system) की भाँति होता है तथा डाटा के डुप्लीकेशन (Duplication) को कम करता है, साथ ही कोई भी वांछित सूचना सरलता से एक्सेस करता है।

इस एकीकृत फाइल सिस्टम में अनेक फाइल्स एक दूसरे से सम्बद्ध होते हुए भी पूर्णता का आभास प्रदान करती हैं। टेलीफोन डायरेक्ट्री, इसका एक अच्छा उदाहरण हैं।

उदाहरण: यदि आपने किसी इण्डेक्स्ड एड्रेस बुक (Indexed address book) में अपने जानने वाले व्यक्तियों के नाम, टेलीफोन नम्बर एवं एड्रेस को लिख रखा है, तो इसे एक डाटाबेस कहा जा सकता हैं।

DBMS की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(i) डाटाबेस का निर्माण करना।

(ii) नए डाटा को सम्मिलित करना या जोड़ना।

(iii) वर्तमान डाटा को सम्पादित करना।

(iv) डाटा को अस्थायी एवं स्थायी रूप से डिलीट करना।

2. नॉर्मलाइजेशन से आप क्या समझते हैं? 2NF क्या है और उसके लाभ व हानियाँ क्या है?

अथवा

विभिन्न प्रकार के नॉर्मलाइजेशन के लाभ क्या है?

अथवा

नॉर्मलाइजेशन क्या है? इससे प्राप्त लाभ को लिखें।

अथवा

नॉर्मलाइजेशन का वर्णन कीजिए। द्वितीय नॉर्मल फॉर्म को समझाइट।

उत्तर: रिलेशनल मॉडल के अन्तर्गत नॉर्मलाइजेशन का मुख्य कार्य डाटाबेस में होने वाली पुनरावृत्ति (Redundancy) को कम करना है। दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि डाटा को केवल एक ही बार संग्रहीत करना चाहिए, क्योंकि डाटा को अनेक बार तथा अनेक जगह पर संग्रहीत करने में समय व स्टोरेज दोनों का ही व्यय होता है। डाटा को नॉर्मलाइज करने के लिए टेबल को अन्य टेबल में विभक्त किया जाता है।

(ii) द्वितीय नॉर्मल फॉर्म कोई भी सारणी द्वितीय नॉर्मल फॉर्म (2NF) में तब कहलाई जाती है, जब वह सारणी प्रथम नॉर्मल फॉर्म में हो तथा प्रत्येक एट्रिब्यूट जोकि Non-key है, प्राइमरी की पर फंक्शनली डिपेण्डेण्ट हो।

Table: Employee:

Emp_NoNameDesignation
25RakeshComputer Operator
26ManishManager
27RakeshComputer Program

इस टेबल में प्राइमरी की Emp_No है, यहाँ पर एट्रिब्यूट प्राइमरी की पर फंक्शनली डिपेण्डेण्ट नहीं है, इसलिए इसे निम्न प्रकार से विभक्त करेंगे:

Emp_NoName
25Rakesh
26Manish
27Rakesh
Emp_NoDesignation
25Computer Operator
26Manager
27Computer Program

अब इस प्रकार से बनी टेबल में कोई Designation हटाया जाता है, तो डाटा नष्ट नहीं होगा।

नॉर्मलाइजेशन से निम्न प्रकार के लाभ होते हैं-

(i) यह डाटा की होने वाली पुनरावृत्ति को कम करता है तथा यह आकार में छोटा होता है, इसलिए इसे स्टोर करने के लिए कम मैमोरी की आवश्यकता होती है।

(ii) डाटा की पुनरावृत्ति नहीं होती, डाटा की एक से अधिक विभिन्न प्रतियों को स्टोर करने की सम्भावना कम होती है।

नॉर्मलाइजेशन के प्रयोग से निम्न हानियाँ हैं-

(i) डाटा को नॉर्मलाइज्ड करने के लिए अधिक मैमोरी की आवश्यकता होती है।

(ii) डाटाबेस में अधिक टेबल होती है, जिन्हें जोड़ना कठिन होता है।

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