NIOS Class 12 Psychology Chapter 24 समग्र विकास के लिए मनोविज्ञान Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 12 Psychology Chapter 24 समग्र विकास के लिए मनोविज्ञान Notes in Hindi and select need one. NIOS Class 12 Psychology Solutions Hindi Medium Download PDF. NIOS Study Material of Class 12 Psychology Notes Paper Code: 328.
NIOS Class 12 Psychology Chapter 24 समग्र विकास के लिए मनोविज्ञान
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समग्र विकास के लिए मनोविज्ञान
Chapter: 24
| पाठगत प्रश्न 24.1 |
1. स्थितिस्थापन का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: स्थिति स्थापन भावनात्मक स्वास्थ्य को एक अनिवार्य गुण है क्योंकि यह व्यक्ति को कठिन स्थितियों और चुनौतियों को सहने और उनसे उबरने में सक्षम बनाती है। जीवन में उतार-चढ़ाव बने रहते हैं और प्रत्येक को जीवन उत्तर-चढ़ाव में कभी न कभी कठिनाइयों और हार की सामना करन पड़ता है। स्थिति स्थापन ऐसी चुनौतियों के संग रहने, सकारात्मक दृष्टिकोण निर्मित करने तथा परेशानियों से बाहर निकलने की योग्यता हैं।
2. समग्र विकास के घटकों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर: शारीरिक इस गुण में शरीर के संवेदनशील अंग शामिल होते हैं जैसे त्वचा, कान, नाक, जीभ और आँखें।
ज्ञानात्मकः मस्तिष्क के बुद्धिमतापूर्ण कार्य जैसे सोचना, पहचानना, कारण खोजना, चिश्लेषण करना, सश्लेषण करना स्मरण करना और आकलन करना शामिल होते हैं।
मनोवैज्ञानिकः यह घटक दर्शाता है कि किस प्रकार किसी व्यक्ति में सोचने, अनुभव करने, और व्यवहार करने प्रकार की योग्यता काम करती हैं।
सामाजिकः यह वह तरीका है जिसके द्वारा व्यक्ति अन्य लोगों अथवा लोगों के समूहों के साथ संबाद करता है।
अध्यात्मिकः यह किसी व्यक्ति की चेतना और विश्वास गुण है जो किसी व्यक्ति के जीवन का संदर्शन है तथा उसको अर्थ प्रदान करता है। इसमें उसके मूल्य करता एवं गुण भी शामिल होते है।
पाठगत प्रश्न 24,2
सही और गलत को चुनिए।
1. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार प्रसन्नता केवल सकारात्मक मूड की अनुभूति अथवा अनुभव है। (सही/गलत)
उत्तर: गलत।
2. प्रक्रिया/गतिविधि थ्योरी कहती है कि प्रसन्नता को चुनौतीपूर्ण गतिविधियों में सलंग्न हो कर तथा श्रम करके बढ़ाया जा सकता है। (सही/गलत)
उत्तर: सही।
3. नोरिश और वैला ब्रोड्रिक (2008) के अनुसार प्रसन्नता को बढ़ाने की कोशिश करना बेकार है क्योंकि प्रसन्नता के स्तर पूर्व निर्धारित हैं और समय के साथ स्थिर रहते हैं। (सही/गलत)
उत्तर: सही।
पाठांत प्रश्न
1. समग्र विकास की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: समग्र विकास से आशय व्यक्ति के सर्वांगीण उन्नयन से है, जिसमें शारीरिक, बौद्धिक, भावनात्मक, सामाजिक तथा नैतिक सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास शामिल होता है। मनोविज्ञान के अनुसार, एक व्यक्ति तभी पूर्ण रूप से विकसित माना जाता है जब उसकी सोचने-समझने की क्षमता, भावनाओं को नियंत्रित करने की योग्यता, सामाजिक संबंधों को निभाने की कौशल, नैतिक मूल्यों की समझ तथा शारीरिक स्वास्थ्य सभी दिशा में समान रूप से विकसित हों। समग्र विकास व्यक्ति को आत्मविश्वासी, अनुकूलनशील, समस्या-समाधान में सक्षम तथा समाज का जिम्मेदार सदस्य बनाता है; इसलिए शिक्षा प्रक्रिया में मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक प्रगति को शारीरिक विकास के साथ जोड़कर देखा जाता है।
2. सन्तुष्टि को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं?
उत्तर: सन्तुष्टि को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक व्यक्ति के समग्र विकास से जुड़े होते हैं, जिनमें उसकी शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति, भावनात्मक सुरक्षा, सकारात्मक सामाजिक संबंध, आत्म-सम्मान, जीवन में उपलब्धि की भावना, और व्यक्तिगत अपेक्षाओं व वास्तविकताओं के बीच सामंजस्य शामिल हैं। मनोविज्ञान के अनुसार, जब व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर संतुलन प्राप्त करता है, तो उसकी संतुष्टि बढ़ती है, जबकि तनाव, असफलता, असुरक्षा और समर्थन की कमी संतुष्टि को कम कर देते हैं।
3. स्थिति स्थापन की महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मनोविज्ञान के अनुसार स्थिति स्थापन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने वातावरण, सामाजिक परिस्थितियों और जीवन की मांगों के अनुसार स्वयं को ढालता है। इसकी महत्ता इसलिए है क्योंकि यह व्यक्ति को तनाव कम करने, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने, स्वस्थ संबंध विकसित करने और बदलती परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में मदद करती है। अच्छी स्थिति-स्थापन क्षमता व्यक्ति को समस्याओं को हल करने, मानसिक स्वास्थ्य को स्थिर रखने और जीवन में संतुष्टि प्राप्त करने में सहायक होती है।

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