NCERT Class 9 Hindi Chapter 7 मैं और मेरा देश

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NCERT Class 9 Hindi Chapter 7 मैं और मेरा देश

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Chapter: 7

गद्य खंड
अभ्यास

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?

(क) पूर्णता के भाव की तुष्टि।

(ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति।

(ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार।

(घ) सुख-सुविधाओं का अभाव।

उत्तर: (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार।

कारण: लेखक को अपने घर, पड़ोस और नगर से सब कुछ मिल रहा था और वह सोचता था कि उसकी मनुष्यता में कोई अपूर्णता नहीं है, यानी वह स्वयं को पूर्ण मानता था। परंतु उसे जब यह अहसास हुआ कि देश के गुलाम होने पर कोई भी मामूली अपराधी की तरह उसका अपमान कर सकता है, तो उसकी इस ‘पूर्णता’ के अहसास पर गहरी चोट (प्रहार) लगी। इसी प्रहार को आनंद की दीवार में ‘दरार’ कहा गया है।

2. निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?

(क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का।

(ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का।

(ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का।

(घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का।

उत्तर: (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का।

कारण: निबंध में लेखक स्पष्ट रूप से कहता है कि “यह बात को खोलने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है”। इसका अर्थ है कि लेखक को उन प्रश्नों के उत्तर देने में आनंद आता है जो चर्चा को आगे बढ़ाते हैं और विषय का विस्तार करने का अवसर देते हैं।

3. “अपने समान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में—

(क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।

(ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।

(ग) महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।

(घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।

उत्तर: (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।

कारण: निबंध के अनुसार, जब देश गुलाम होता है, तो व्यक्ति के पास चाहे दुनिया भर के या स्वर्ग के सारे साधन क्यों न हों, वे उसे गौरव नहीं दे सकते। लाला लाजपत राय के उदाहरण से स्पष्ट है कि विदेश जाने पर भी उन्हें अपने देश की गुलामी की लज्जा का कलंक महसूस होता था, जो यह दर्शाता है कि पराधीनता में व्यक्ति का आत्मसम्मान कुचला जाता है।

4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि—

(क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।

(ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।

(ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।

(घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।

उत्तर: (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।

कारण: लेखक का यह स्पष्ट विचार है कि “संसार के ही नहीं, यदि स्वर्ग के भी सब उपहार और साधन हों, पर उसका देश गुलाम हो या किसी भी दूसरे रूप में हीन हो तो वे सारे उपहार और साधन उसे गौरव नहीं दे सकते”।

5. “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी सान है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?

(क) देश और नागरिक।

(ख) देश और संविधान।

(ग) देश और विदेश।

(घ) व्यवसाय और आजीविका।

उत्तर: (क) देश और नागरिक।

कारण: पाठ में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि “उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है, जो नागरिक और देश को एक साथ बाँधती है”। जापान के फल देने वाले युवक और पुस्तकालय से चित्र चुराने वाले युवक के उदाहरण से लेखक देश और नागरिक के इसी गहरे संबंध को जोड़ता है।

6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?

(क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था।

(ख) पारिवारिक संबंधों का महत्त्व।

(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध।

(घ) देश का महत्त्व और व्यक्ति की उपेक्षा।

उत्तर: (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध।

कारण: पाठ के परिचय में ही यह बताया गया है कि “‘मैं और मेरा देश’ एक ऐसी रचना है जो व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को गहराई से स्थापित करती है”। पूरा निबंध इसी बात पर केंद्रित है कि नागरिक के सम्मान से देश का सम्मान और देश के सम्मान से नागरिक का सम्मान जुड़ा हुआ है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—

1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?

उत्तर: स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर इसलिए मुग्ध हो गए क्योंकि उस युवक ने फलों का मूल्य लेने से इंकार कर दिया और इसके बदले केवल यह चाहा कि उसके देश का सम्मान बना रहे। युवक के इस नि:स्वार्थ कार्य और देशभक्ति की भावना ने उसके देश के गौरव को बहुत ऊँचा कर दिया था, जिसे देखकर स्वामी जी अत्यंत प्रभावित हुए।

2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।

उत्तर: जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में यह माँगा कि स्वामी जी अपने देश जाकर किसी से यह न कहें कि “जापान में अच्छे फल नहीं मिलते”। इस घटना से हमारे मन में उस युवक की एक सच्चे देशभक्त, स्वाभिमानी और नि:स्वार्थ नागरिक की छवि उभरती है। वह अपने देश की प्रतिष्ठा के प्रति बेहद जागरूक था और अपने व्यक्तिगत आर्थिक लाभ से कहीं अधिक अपने देश के सम्मान को महत्त्व देता था।

3. “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे यह तर्क है कि प्रत्येक नागरिक अपने देश के साथ गहराई से बँधा हुआ है। व्यक्ति के अच्छे या बुरे आचरण का सीधा प्रभाव केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी हीनता और गौरव का फल उसके देश को भी भुगतना पड़ता है।

निबंध में इसे दो स्पष्ट उदाहरणों से समझाया गया है:

(i) सकारात्मक उदाहरण: जापान के एक युवक ने स्वामी रामतीर्थ को बिना मूल्य लिए फल भेंट किए, जिसके इस छोटे से लेकिन महान कार्य ने अकेले ही पूरे जापान देश का गौरव ऊँचा कर दिया।

(ii) नकारात्मक उदाहरण: जब एक दूसरे देश के विद्यार्थी ने जापान के एक पुस्तकालय की पुस्तक से दुर्लभ चित्र चुराए, तो उसे तो दंड मिला ही, साथ ही पुस्तकालय के बाहर एक बोर्ड लगा दिया गया कि उस विद्यार्थी के देश का कोई भी निवासी वहाँ प्रवेश नहीं कर सकता। इस प्रकार, एक व्यक्ति के कलंकित आचरण ने उसके पूरे देश के मस्तक पर कलंक का टीका लगा दिया।

मेरे अनुभव मेरे विचार

1. “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि व्यक्ति और देश एक-दूसरे के पूरक हैं। नागरिक और देश को अलग नहीं किया जा सकता।

उदाहरण: जब हमारे देश का कोई खिलाड़ी (जैसे- नीरज चोपड़ा) ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतता है, तो वह केवल अपना नहीं बल्कि पूरे भारत का गौरव बढ़ाता है। इसी प्रकार, यदि हमारे देश का कोई नागरिक विदेश में जाकर कोई अपराध करता है या गलत आचरण करता है (जैसे पाठ में पुस्तक से चित्र चुराने वाले विदेशी विद्यार्थी का उदाहरण), तो विदेशियों की नजर में पूरे देश की छवि खराब होती है और देश के मस्तक पर कलंक लग जाता है।

2. “मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।”

(क) प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किन-किनका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।

उत्तर: एक विद्यार्थी के रूप में सुबह उठने से लेकर रात तक मुझे माँ की जरूरत पड़ती है जो मुझे नाश्ता देती हैं और तैयार करती हैं। स्कूल जाने के लिए बस ड्राइवर या पिताजी की जरूरत होती है। विद्यालय में मुझे ज्ञान देने के लिए शिक्षकों और खेलने/पढ़ने के लिए सहपाठियों की जरूरत पड़ती है। इसके बदले में, मैं भी दूसरों को सहयोग देता हूँ। जैसे- घर पर मैं अपनी छोटी बहन को होमवर्क करवाता हूँ, माता-पिता की छोटे-मोटे कामों में मदद करता हूँ, और कक्षा में किसी सहपाठी को कोई विषय समझ न आए तो उसकी सहायता करता हूँ।

(ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।

उत्तर: यहाँ ‘बहुतों’ में वे सभी लोग सम्मिलित हैं जो हमारे सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा हैं। इनमें हमारे माता-पिता, भाई-बहन, पड़ोसी, शिक्षक, डॉक्टर, पुलिस, किसान (जो हमारे लिए अन्न उपजाते हैं), और सफाई कर्मचारी आदि शामिल होंगे।

(ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।

उत्तर: रचनाकार (लेखक) को समाज से अपने जीवनयापन के लिए, अपने नगर के समाज से ज्ञान भंडार प्राप्त करने के लिए, और अपनी रचनाओं को लोगों तक पहुँचाने के लिए पाठकों और प्रकाशकों के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी। बदले में, लेखक समाज को अपने उत्कृष्ट विचारों, साहित्य और मार्गदर्शन का दान देता होगा जिससे लोगों में जागरूकता और देशभक्ति की भावना जागृत हो।

3. “सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”

(क) उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं? अपने उत्तर को विस्तार देने के लिए अपने घर या आस-पास के बड़ों और अध्यापक से चर्चा करके लिखिए।

उत्तर: देश की सुरक्षा केवल सीमा पर बंदूक लेकर लड़ना नहीं है। हम नागरिकों का दायित्व है कि हम अपने-अपने स्तर पर ईमानदारी से काम करें। एक छात्र के रूप में मेरा दायित्व है कि मैं अपनी शिक्षा पूरी लगन से करूँ और भविष्य में एक योग्य नागरिक बनूँ। हमें देश के शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध को बनाए रखना चाहिए। इसके अलावा टैक्स चोरी न करना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना और देश की एकता बनाए रखना हम सभी का दायित्व है।

(ख) अपने आस-पास में विचरने वाले पशु-पक्षियों की दिनचर्या का अवलोकन कीजिए और अपने अवलोकन के आधार पर लिखिए कि आप उनके संघर्षों को किस रूप में देखते हैं? (संकेत– आप अपनी पाठ्यपुस्तक में दी गई कहानी ‘दो बैलों की कथा’ के मुख्य पात्रों के अनुभवों को भी आधार बना सकते हैं।)

उत्तर: मैंने देखा है कि पक्षी सुबह से ही दाने की तलाश में भटकते हैं और आंधी-बारिश में अपने घोंसले बचाने का संघर्ष करते हैं। ‘दो बैलों की कथा’ के हीरा और मोती की तरह हर पशु को अपने अस्तित्व, स्वतंत्रता और पेट भरने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उनका जीवन भी एक मौन युद्ध है, जहाँ उन्हें अपने अधिकारों और आत्मसम्मान के लिए हर दिन लड़ना पड़ता है।

(ग) इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? आप अपने घर के बड़ों से इस विषय पर चर्चा करके उनके और अपने विचार लिखिए।

उत्तर: मैंने अपने घर के बड़ों (दादा जी) से इस विषय पर चर्चा की। उनके और मेरे विचार से जीवन को युद्ध इसलिए कहा गया है क्योंकि जीवन में पल-पल हमें अनेक कठिनाइयों, बुराइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सफलता पाने के लिए हमें लगातार आलस्य और अज्ञान रूपी शत्रुओं से लड़ना होता है।

(घ) देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?

उत्तर: हमारे आस-पास सफाई कर्मचारी, किसान, मजदूर, इंजीनियर और यातायात पुलिस जैसे अनेक लोग कार्यरत हैं जो हमारे जीवन को आसान बनाते हैं। हम उनके लिए यह कर सकते हैं कि उनके काम का सम्मान करें। उदाहरण के लिए- हम कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालें ताकि सफाई कर्मचारियों का काम न बढ़े।

4. “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”

(क) उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि आस-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?

उत्तर: इस पंक्ति से पता चलता है कि उस समय आस-पड़ोस के लोगों में बहुत गहरा और आत्मीय संबंध रहा होगा। पड़ोसी एक-दूसरे को अपने परिवार का ही हिस्सा मानते होंगे, बच्चों को पूरे मोहल्ले का प्यार और ममता मिलती होगी और लोग सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े रहते होंगे।

(ख) वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इसके क्या कारण हो सकते हैं? लिखिए।

उत्तर: वर्तमान समय में पड़ोसियों के बीच की घनिष्ठता और आत्मीयता बहुत कम हो गई है। आज लोग अपने बगल वाले पड़ोसी तक को ठीक से नहीं जानते। इसके मुख्य कारण शहरीकरण, काम की अधिकता और व्यस्त दिनचर्या, फ्लैट्स की बंद दरवाज़े वाली संस्कृति और मोबाइल/इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग है।

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