NCERT Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक Solutions As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक Notes and select need one. NCERT Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक Question Answers Download PDF. NCERT Class 9 Hindi Texbook Solutions.
NCERT Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक
Also, you can read the NCERT book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Central Board of Secondary Education (CBSE) Book guidelines. CBSE Class 9 Hindi Textual Solutions are part of All Subject Solutions. Here we have given NCERT Class 9 Hindi Textual Notes, CBSE Class 9 Hindi Textbook Notes for All Chapters, You can practice these here.
आखिरी चट्टान तक
Chapter: 5
| गद्य खंड |
| अभ्यास |
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
(क) विवेकानंद चट्टान से।
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से।
(ग) पश्चिमी क्षितिज से।
(घ) सैंड हिल से।
उत्तर: (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से।
कारण: लेखक सैंड हिल पर गए थे, लेकिन वहाँ से सूर्यास्त का पूरा दृश्य देखने के लिए एक और ऊँचा टीला रास्ते में आ रहा था। इसलिए, सूर्यास्त को पूरे विस्तार के साथ देखने के लिए वह सैंड हिल से आगे अरब सागर की ओर स्थित एक अन्य ऊँचे टीले पर गया और वहीं से उसने सूर्यास्त देखा।
2. “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है?
(क) मौन हो जाना।
(ख) विस्मित हो जाना।
(ग) भ्रमित हो जाना।
(घ) आशंकित होना।
उत्तर: (ख) विस्मित हो जाना।
कारण: जब लेखक आखिरी चट्टान पर खड़ा होकर तीनों ओर क्षितिज तक फैले असीम सागर की विशालता और टकराती लहरों को देखता है, तो वह प्रकृति की भव्यता देखकर इतना विस्मित (आश्चर्यचकित) हो जाता है कि वह अपने होने का अहसास भी भूल जाता है और स्वयं को उस दृश्य का ही एक हिस्सा महसूस करने लगता है।
3. “मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
(क) करुणा।
(ख) विनम्रता।
(ग) आत्मीयता।
(घ) संतुष्टि।
उत्तर: (घ) संतुष्टि।
कारण: रेत के एक के बाद एक कई ऊँचे टीलों को पार करते हुए लेखक की टाँगें थक रही थीं, लेकिन जब वह आखिरकार सबसे ऊँचे टीले पर पहुँचकर समुद्र का खुला विस्तार देखता है, तो वह “अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर” बैठ जाता है। उसे उस टीले तक पहुँचने की सफलता पर गहरी संतुष्टि महसूस होती है।
4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है—
(क) बलखाती लहरों का।
(ख) सागर की व्यापकता का।
(ग) सूर्यास्त के दृश्य का।
(घ) पश्चिमी क्षितिज का।
उत्तर: (ख) सागर की व्यापकता का।
कारण: लेखक जब चट्टान पर मौजूद था, तब उसने देखा कि तीनों तरफ क्षितिज तक केवल पानी-ही-पानी था। यह पंक्ति सागर के उस अंतहीन फैलाव (विस्तार) और उसमें मौजूद असीम प्राकृतिक ताकत का सजीव वर्णन कर रही है।
5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि—
(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।
उत्तर: (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
कारण: इस यात्रा-वृत्तांत में लेखक ने न केवल कन्याकुमारी की भौगोलिक सुंदरता का वर्णन किया है, बल्कि वहाँ के दृश्यों को देखकर अपने मन में उठने वाली गहरी भावनाओं, विस्मय और आत्मिक शांति को भी अत्यंत सजीवता के साथ व्यक्त किया है। यह वर्णन पाठक को भी उस जीवंत अनुभूति का हिस्सा बना देता है।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—
1. यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?
उत्तर: सैंड हिल (Sand Hill) पर बहुत से यात्री सूर्यास्त देखने के लिए इकट्ठा हुए थे, जहाँ का माहौल काफी रंगीन था। लेखक भी वहाँ पहुँचा और उसे सामने का पूरा विस्तार दिखाई भी दे रहा था, लेकिन अरब सागर की तरफ एक और बहुत ऊँचा रेत का टीला था, जो सूर्यास्त के उस पार के विस्तार को अपनी ओट (पीछे) में छिपाए हुए था। लेखक की इच्छा थी कि वह डूबते हुए सूर्य को उसकी पूरी पृष्ठभूमि और पश्चिमी क्षितिज के खुले विस्तार के साथ देखे। सैंड हिल से यह संभव नहीं हो पा रहा था। इसलिए, उस विहंगम और अबाधित दृश्य को अपनी आँखों में कैद करने की तीव्र लालसा के कारण, लेखक सैंड हिल पर रुकने के बजाय रेत पर अपने पैर घसीटते हुए उस और अधिक ऊँचे टीले की तरफ बढ़ गया।
2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?
उत्तर: लेखक ने कन्याकुमारी के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ वहाँ के स्थानीय लोगों के जीवन की कड़वी सच्चाई (विशेषकर बेरोजगारी और गरीबी) का बहुत ही यथार्थवादी वर्णन किया है।
लेखक ने बताया कि:
(i) शिक्षित बेरोजगारी: कन्याकुमारी की लगभग आठ हजार की आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक ऐसे हैं जो पूरी तरह बेरोजगार हैं, जिनमें से करीब सौ तो ग्रेजुएट हैं।
(ii) जीवनयापन का संघर्ष: ये स्थानीय युवा अपना गुजारा करने के लिए पर्यटकों को फोटो-एल्बम, शंख और सीपियों की मालाएँ बेचते हैं।
(iii) बेबसी और दार्शनिकता: उनका मुख्य काम सिर्फ नौकरियों के लिए अर्जियाँ (Applications) देना और खाली बैठकर दार्शनिक सिद्धांतों पर लंबी-लंबी बहस करना रह गया है।
(iv) गरीबी का आलम: स्थिति इतनी दयनीय है कि पेट भरने के लिए ये युवा “सीपियों का गूदा निकालकर खाते हैं”। यह दृश्य वहाँ की खूबसूरती के पीछे छिपे जीवन के कठोर यथार्थ को सामने लाता है।
3. “अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया” इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: ‘प्रयत्न की सार्थकता’ का अर्थ है— कठिन परिश्रम के बाद लक्ष्य की प्राप्ति होना और उससे मिलने वाली असीम मानसिक संतुष्टि। जब लेखक सूर्यास्त देखने के लिए सैंड हिल से आगे बढ़ा, तो उसे एक के बाद एक कई ऊँचे टीले पार करने पड़े। उसकी टाँगें पूरी तरह थक चुकी थीं, लेकिन उसका मन थकने को तैयार नहीं था। वह हर अगले टीले पर यह सोचकर चढ़ता कि शायद यहाँ से पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार दिख जाए। जब वह आखिरकार सबसे ऊँचे और अंतिम टीले पर पहुँचा, तो उसके सामने समुद्र तक जाने वाली लंबी ढलान और खुला जल-विस्तार था, जहाँ सूर्य पानी की सतह से थोड़ा ही ऊपर था। इस अद्भुत और भव्य दृश्य को ढूँढ़ निकालने में जो उसकी शारीरिक थकान और मेहनत लगी थी, वह सफल हो गई थी। इसी सफलता पर गर्व करते हुए लेखक को ऐसा लगा “जैसे वह टीला संसार की सबसे ऊँची चोटी हो, और मैंने, सिर्फ मैंने, उस चोटी को पहली बार सर किया हो”। यही उसकी ‘प्रयत्न की सार्थकता’ थी।
4. यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।
उत्तर: इस यात्रा में लेखक ने कई ऐसे दृश्य देखे जो उनके लिए बिल्कुल अद्भुत और अकल्पनीय थे:
(i) अनगिनत रंगों वाली रेत: लेखक ने पहले भी कई समुद्र तटों की रेत देखी थी, लेकिन यहाँ की रेत में अनगिनत ‘अनाम रंग’ थे जो एक-एक इंच पर एक-दूसरे से अलग थे। लेखक को लगा जैसे “काली घटा और घनी लाल आँधी को मिलाकर” इन रंगों को ढाला गया हो। यह जादुई रेत उनके लिए एक नया अनुभव था।
(ii) सूर्यास्त के बदलते रंग: सूर्य के पानी में डूबते ही पानी पर दूर तक “सोना-ही-सोना ढुल आया” और फिर वह रंग इतनी तेज़ी से बदला कि कुछ क्षणों में सुनहरा रंग लहू (खून) जैसा लाल हो गया, फिर धीरे-धीरे बैंगनी और अंत में काला पड़ गया।
(iii) स्वयं को भूल जाने का अनुभव: जब लेखक आखिरी चट्टान पर खड़ा था, तो तीनों ओर (अरब सागर, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी) क्षितिज तक पानी-ही-पानी था। लहरों की “विस्तार की शक्ति” देखकर वह इतना विस्मित हुआ कि वह भूल गया कि वह एक जीवित व्यक्ति है और स्वयं उस दृश्य का एक हिस्सा बन गया।
5. यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।
उत्तर: लेखक की मानसिक दृढ़ता, साहस और हार न मानने की प्रवृत्ति को दर्शाने वाले दो प्रमुख अंश निम्नलिखित हैं:
(i) पहला अंश (शारीरिक थकान पर इच्छाशक्ति की जीत): सूर्यास्त का पूरा दृश्य देखने की ज़िद में लेखक लगातार ऊँचे टीलों पर चढ़ रहा था। लेखक लिखता है— “जल्दी-जल्दी चलते हुए मैंने एक के बाद एक कई टीले पार किए। टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था।” यह दर्शाता है कि लेखक का मन उसके शरीर से ज्यादा मज़बूत था।
(ii) दूसरा अंश (संकट के समय साहस और सूझबूझ): जब लौटते समय अँधेरा घिर आया और समुद्र का पानी तट पर तेज़ी से बढ़ने लगा, तो लेखक घबराया नहीं बल्कि अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष किया। लेखक लिखता है— “सामने एक ऊँची चट्टान थी… पानी की तरफ पाँव बढ़ाने का मेरा साहस नहीं हुआ। मैं चट्टान की नोकों पर पैर रखता किसी तरह उसके ऊपर पहुँच गया।” यह अंश दिखाता है कि खतरे और घबराहट के बीच भी लेखक ने हार नहीं मानी और सुरक्षित स्थान पर पहुँचने का रास्ता निकाल लिया।
विषयों से संवाद
यात्रा और खोज
1. संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएँ की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है। पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत और उनके लेखकों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए और लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक संकेत नीचे दिया गया है।
| यात्रा-वृत्तांत | स्थान | रचनाकार |
| किन्नर देश में | हिमाचल प्रदेश में स्थित किन्नौर | राहुल सांकृत्यायन |
उत्तर:
| यात्रा-वृत्तांत | स्थान | रचनाकार |
| किन्नर देश में | हिमाचल प्रदेश में स्थित किन्नौर | राहुल सांकृत्यायन |
| आखिरी चट्टान तक | कन्याकुमारी | मोहन राकेश |
| प्रयाग: 1976 | इलाहाबाद (प्रयाग) का कुंभ मेला | निर्मल वर्मा |
| अरे यायावर रहेगा याद | भारत के विभिन्न स्थल | अज्ञेय |
| मेरी तिब्बत यात्रा | तिब्बत | राहुल सांकृत्यायन |
Subject Ka Complete Video Solution Dekhein
Step-by-step easy concept explanation aur full questions Answer ke liye watch karein ya app download karein:

