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NCERT Class 9 Hindi Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं
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ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)
Chapter: 4
| गद्य खंड |
| अभ्यास |
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?
(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना।
(ख) भय और संशय के साथ जीना।
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना।
(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना।
उत्तर: (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना।
कारण: लता जी ने साक्षात्कार में स्पष्ट रूप से बताया है कि उन्होंने अपने पिताजी से “सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा” ली। उन्होंने यह भी सीखा कि “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है”, जो सच्चाई और दृढ़ता के मार्ग को दर्शाता है।
2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?
(क) संघर्ष।
(ख) निराशा।
(ग) भौतिकता।
(घ) कर्तव्यनिष्ठा।
उत्तर: (घ) कर्तव्यनिष्ठा।
कारण: कम उम्र में ही पिताजी की मृत्यु के बाद लता जी ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उनके दिमाग में हमेशा यही बात घूमती थी कि किस तरह वे अपने परिवार के लिए ज्यादा से ज्यादा कमाकर उनकी जरूरतें पूरी कर सकती हैं। उनका यह त्याग और मेहनत उनके परिवार के प्रति गहरी ‘कर्तव्यनिष्ठा’ (जिम्मेदारी की भावना) को प्रमाणित करता है।
3. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव।
(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी।
(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्त्व।
(घ) संगीत की महत्त्वपूर्ण सामाजिक भूमिका।
उत्तर: (घ) संगीत की महत्त्वपूर्ण सामाजिक भूमिका।
कारण: मंगलागौर उत्सव में नई बहू के आने पर आस-पड़ोस की औरतें इकट्ठा होकर मुग्ध भाव से गीत गाती थीं और नाचती थीं। यह प्रसंग दर्शाता है कि भारतीय समाज में विवाह और उत्सवों जैसे सामाजिक अवसरों पर लोगों को एक साथ जोड़ने और मेलजोल बढ़ाने में संगीत की बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।
4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” — इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
उत्तर: (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
कारण: लता जी ने यह मराठी कहावत अपने नश्वर शरीर और अमर गानों के संदर्भ में कही है। इसका अर्थ यह है कि मनुष्य का शरीर (गाँव) एक दिन समाप्त हो जाता है, लेकिन उसके द्वारा किए गए श्रेष्ठ कार्य और उसकी पहचान (नाम) हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं।
5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(क) औपचारिक।
(ख) कामकाजी।
(ग) आत्मीय।
(घ) प्रतिस्पर्धात्मक।
उत्तर: (ग) आत्मीय।
कारण: लता जी ने स्वयं कहा है कि कोरस गाने वाली लड़कियों के साथ उनका बहुत अच्छा संबंध था और वे लड़कियाँ बिल्कुल उनके “घर जैसी थीं”। उनका एक-दूसरे के घर आना-जाना था और वे पारिवारिक समारोहों में भी शामिल होती थीं, जो उनके बीच एक गहरे और आत्मीय (पारिवारिक) संबंध को दर्शाता है।
6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।
(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
उत्तर: (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
कारण: हालाँकि लता जी तानसेन के दीपक राग से दीये जलने या बारिश होने की घटनाओं की ऐतिहासिक सत्यता की पुष्टि नहीं करतीं, लेकिन वे यह जरूर मानती हैं कि “संगीत में वह असीम शक्ति है कि कुछ अप्रत्याशित रच देता है”। उस्ताद अली अकबर खाँ के सरोद वादन के दौरान शुद्ध स्वर से तार टूटने का उदाहरण भी संगीत की इसी अनंत सीमा और शक्ति को दर्शाता है।
7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यत: कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की।
(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध।
(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति।
(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली।
उत्तर: (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की।
कारण: पूरे पाठ में लता जी एक ऐसी महिला के रूप में उभरती हैं जो अपार प्रसिद्धि और धन के बावजूद एक छोटे से घर में सादगी और खुशी से रहती हैं। वे अपने परिवार और संगीत के प्रति पूरी तरह समर्पित रही हैं, और अपने माता-पिता से सीखे गए मूल्यों के अनुसार जीवन भर ‘स्वाभिमान’ के साथ जीती रही हैं।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—
1. “पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’… इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।’” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत– यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)
उत्तर: यह प्रसंग स्पष्ट करता है कि उनके पिता के अनुशासन में मार-पीट या डाँट-डपट नहीं थी, बल्कि उनका गंभीर स्वभाव ही बच्चों को गलती का अहसास कराने के लिए काफी था। पिताजी जब बच्चों को बुलाकर सिर्फ गंभीरता से देखते थे, तो बच्चे अपनी गलती समझकर रोने लगते थे। यहाँ अनुशासन में डर से अधिक पिता के प्रति गहरा सम्मान दिखाई देता है। गलती का अहसास होने के तुरंत बाद पिताजी का यह कहना कि “अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो”, बच्चों के प्रति उनके असीम स्नेह और कोमलता का प्रतीक है। इस प्रकार यह प्रसंग अनुशासन और प्रेम के बीच एक बेहतरीन संतुलन को दर्शाता है।
2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
उत्तर: लता मंगेशकर पर अपने पिता के व्यक्तित्व और संस्कारों की बहुत गहरी छाप थी। उन्होंने अपने पिता से सबसे अधिक ‘स्वाभिमान के साथ जीने की प्रेरणा’ ली थी। उनके पिता ने उन्हें सिखाया था कि “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है”। उनके इसी प्रभाव के कारण लता जी ने विपरीत परिस्थितियों और बुरे हालातों में भी कभी किसी के आगे हाथ नहीं पसारे और पूरी उम्र स्वाभिमान व सच्चाई के मार्ग पर चलते हुए अपने परिवार को सँभाला।
3. “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्त्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?
उत्तर: लता जी के लिए ‘नाम आगे बढ़ाने’ का अर्थ सिर्फ अपनी प्रसिद्धि या पैसा कमाना बिल्कुल नहीं था। उन्होंने एक मराठी कहावत “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” का उल्लेख किया, जिसका अर्थ है कि यह नश्वर शरीर (गाँव) नष्ट हो जाता है, लेकिन व्यक्ति के श्रेष्ठ कर्म (नाम) हमेशा अमर रहते हैं। अतः उनके लिए नाम आगे बढ़ाने का मतलब पिता से मिले संगीत के अमूल्य संस्कारों और उनकी गरिमा को दुनिया में जीवित रखना था। यह उनके लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और पवित्र उत्तरदायित्व था, जिसे निभा पाने की उन्हें सबसे अधिक खुशी थी।
4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
उत्तर: साक्षात्कार के अनुसार, लता जी का अपने सहयोगियों (विशेषकर कोरस गाने वाली लड़कियों) के साथ बहुत ही आत्मीय, गहरा और पारिवारिक संबंध था। लता जी के अनुसार वे लड़कियाँ बिल्कुल उनके ‘घर जैसी’ थीं और उनका एक-दूसरे के घर अक्सर आना-जाना होता था। लता जी की बहन मीना की शादी में भी कोरस की सारी लड़कियाँ और लड़के शामिल हुए थे। इसके अलावा, लता जी में अपने रुतबे का कोई घमंड नहीं था; जब स्टूडियो में कुर्सियों की कमी होती थी और कोरस की लड़कियाँ ज़मीन पर बैठती थीं, तो लता जी भी बड़ी सहजता से उनके साथ ज़मीन पर ही बैठकर बातें किया करती थीं। यह सहयोगियों के प्रति उनके सम्मान और सादगी को दर्शाता है।
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