NIOS Class 12 Environmental Science Chapter 33 जल संचयन (संग्रहण) के तरीके

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NIOS Class 12 Environmental Science Chapter 33 जल संचयन (संग्रहण) के तरीके

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Chapter: 33

माड्यूल – 8A जल संसाधन प्रबंधन

पाठगत प्रश्न 30.1

1. यद्यपि भारत संसार का सबसे आर्द्र देश है, फिर भी उसके कुछ भागों में पानी का भीषण कमी है। इस पानी की कमी का क्या कारण है? (एक कारण)

उत्तर: कारण – समय और स्थान के अंतरालों में वर्षा का असमान वितरण।

2. भारत में औसतन सालाना वर्षा के दिनों की कितनी संख्या है?

उत्तर: भारत में औसतन सालाना वर्षा के दिनों की संख्या 40 दिन है।

3. “जल संचयन जल संरक्षण की दिशा में एक बुद्धिमत्ता से भरा कदम है।” कारणों सहित इसकी पुष्टि कीजिए।

उत्तर: अलवण जल का अभाव और बढ़ती हुई जनसंख्या, हमारे देशों के कुछ क्षेत्रों में वर्षा का असमान वितरण, बढ़ता हुआ औद्योगीकरण और शहरीकरण- परन्तु इस कम मात्रा में उपलब्ध संसाधन की अत्यधिक मांग। अतः वर्षा के पानी का संचयन और उसको सूखे मौसमों में संचित रखने की आवश्यकता।

4. विश्व में पानी के अभाव के पीछे कोई तीन कारण बताइये।

उत्तर: विश्व में पानी के अभाव के पीछे कोई तीन कारण है— अकाल (सूखा), बढ़ती जनसंख्या, सिंचाई की बढ़ती मांग, प्रदूषण जो कि पानी की पेयता और उपयोगिता को कम कर रहा है।

पाठगत प्रश्न 30.2

1. किन्हीं दो उदाहरणों को देकर यह सिद्ध कीजिए कि प्राचीन भारत में जल संचयन की प्रणाली मौजूद थी।

उत्तर: सबसे पुरानी जल संचयन व्यवस्थाओं में एक हमारे ही देश के पश्चिमी घाटों के निकट स्थित पुणे शहर के पास पायी जाती है यहाँ पर पहाड़ी के पत्थरों में पेय जल प्रदान करने के लिये कई जलाशयों को खोद लिया गया था। रायगढ़ जैसे किलों में पानी के संरक्षण व संचयन के लिये टैंकों, तालाबों, इत्यादि का निर्माण हुआ था। ये जलाशय और कुऐं अभी भी प्रयोग में लाये जाते हैं; सिंधु घाटी सभ्यता की मोहनजोदड़ो और हड़प्पा नगरों के खंडहर शहरी पानी की आपूर्ति और नालियों की एक सुनियोजित व्यवस्था को दर्शाती है।

2. भूमिगत पानी को पुनर्भरण करने में वन किस प्रकार सहायक थे?

उत्तर: वनों के पेड़-पौधे (वनस्पति) पानी को भूमि में रिस जाने में सहायक हैं। इस प्रकार वे जल तालिका का पुनःभरणकरते हैं।

3. इस बात को बताइये कि प्राचीन समय में पश्चिमी राजस्थान के घरों में किस प्रकार जल संरक्षण होता था।

उत्तर: पश्चिमी राजस्थान के घरों में हर एक निवास स्थल का निर्माण इस प्रकार हुआ था कि वह वर्षा जल का संचयन कर सके और इस वर्षा जल को भूमिगत जलाशयों में संरक्षित रखा जाता था। इस व्यवस्था को अभी भी देखा जा सकता है।

पाठगत प्रश्न 30.3

1. किन्हीं तीन ढांचों का नाम लीजिए जिन्हें भूमिगत पानी को पुनः भरणकरने के लिये निर्मित किया जा सकता है।

उत्तर: कुओं की धुरियों (शाफ्ट) का पुनः भरणकरना, खाई, गड्ढे, बांधो या बण्ड पर नियंत्रण रखना बोर कुओं के साथ पृष्ठीय शाफ्ट। 

2. जल संग्रहण करने के लिये, उन नये अधिनियमों की चर्चा कीजिये जो नागरिक अधिकारियों द्वारा कई नगरों में प्रस्तावित हो रहे हैं।

उत्तर: यदि किसी नयी इमारत के पास वर्षा के पानी के संचयन की व्यवस्था नहीं है, तो उसे पानी या सीवेज का कनेक्शन नहीं दिया जायेगा।

3. किसी भी राज्य में वर्षा जल के संचयन के चार लाभों का जिक्र कीजिये।

उत्तर: पानी की उपलब्धता में वृद्धि करती है, घटती जल तालिका पर नियंत्रण करती है, नमक इत्यादि के तनुकरण द्वारा भूमिगत जल स्तर में बढ़ोत्तरी करती है, भूमि को अपरदन से बचाती है- इसको और बाढ़ को खासकर शहरी क्षेत्रों में नियंत्रण में लाती है। 

4. राजस्थान, यू.पी. और मध्य प्रदेश राज्यों के कुछ ऐसे ढांचों का नाम लीजिए, जिन्हें सूखे मौसम में पौधों के लिये वर्षा जल को संग्रहित करने का प्रयोग होता है।

उत्तर: खादीन, जोहाड़, तलाई, हवेली।

पाठगत प्रश्न 30.4

1. घरेलू स्तर पर जल संचयन के लिये उपयोग में लाये जाने वाले चार मुख्य घटकों की सूची दीजिये।

उत्तर: घरेलू स्तर पर जल संचयन के लिये उपयोग में लाये जाने वाले चार मुख्य घटक है-

(i) स्थान/क्षेत्र जहाँ पर वर्षा का पानी इकट्ठा किया जा सकता है।

(ii) संरक्षण का कोष।

(iii) वितरण का भाग।

(iv) व्यवस्था को कायम रखना।

2. हौजों टैंकों में वर्षा के संचयित जल के संग्रहण को करते समय किन्हीं दो बचावी प्रक्रियाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: संरक्षण के काम में लाये जाने वाले जलकोषों को ढक कर रखना, ताकि वहाँ मच्छर इत्यादि पनप न पायें और शैवाल वृद्धि भी न्यूनतम हो।

3. घरेलू स्तर पर जल संचयन से हमें कैसे लाभ पहुँचता है? (कोई भी तीन)

उत्तर: (क) भूमि में पाये जाने वाले जल का संरक्षण व महीने भर में आने वाले पानी के बिल की दर में कमी।

(ख) स्थानीय बाढ़ों और नालों के बह जाने की समस्याओं में कमी।

(ग) भूमि से नमक (लवणों) को बहा देता है।

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