NIOS Class 12 Biology Chapter 25 पारिस्थितिकी के नियम

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NIOS Class 12 Biology Chapter 25 पारिस्थितिकी के नियम

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Chapter: 25

मॉड्यूल – IV: पर्यावरण एवं स्वास्थ्य

पाठगत प्रश्न 25.1

1. संघटनों के विविध स्तरों के नाम बताएं।

उत्तर: कोशिका → ऊतक → अंग → अंग-तंत्र → जीव → जनसंख्या → समुदाय → पारितंत्र → जीवमंडल।

2. परिस्थितिकी शब्द की परिभाषा लिखे।

उत्तर: जीवों तथा उनके पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंधों के अध्ययन को पारिस्थितिकी कहते हैं।

3. पृथ्वी पर जीवनाधार (life support) के तीन भौतिक तंत्रों के नाम लिखें।

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उत्तर: वायुमंडल, स्थलमंडल, जलमंडल।

4. पर्यावरण के मुख्य घटकों के नाम बताइए।

उत्तर: जैविक (Biotic) और अजैविक (Abiotic) घटक।

5. पर्यावरण के विभिन्न भौतिक कारकों के बारे में चर्चा करें।

उत्तर: पर्यावरण के निर्जीव घटक जो जीवों के जीवन को प्रभावित करते हैं, भौतिक कारक कहलाते हैं।

मुख्य भौतिक कारक:

(i) प्रकाश: पौधों में भोजन बनाने (प्रकाश संश्लेषण) और जीवों की दैनिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।

(ii) तापमान: जीवों की वृद्धि, गतिविधि और रहने का स्थान निर्धारित करता है।

(iii) जल: जीवन के लिए आवश्यक है, सभी जैविक क्रियाएँ जल पर निर्भर करती हैं।

(iv) वायु: ऑक्सीजन श्वसन के लिए और कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण के लिए जरूरी है।

(v) मृदा: पौधों को खनिज और सहारा देती है, जिससे वनस्पति का प्रकार तय होता है।

6. वास को जीवों का पता और निकेत को इसका ‘व्यवसाय’ क्यों कहा जाता है? सिद्ध करे।

उत्तर: वास (Habitat) वह स्थान है जहाँ कोई जीव रहता है। इसलिए इसे जीव का “पता (Address)” कहा जाता है।

निकेत (Niche) वह कार्य या भूमिका है जो जीव अपने पर्यावरण में निभाता है — जैसे भोजन क्या खाता है, कैसे रहता है, कब सक्रिय होता है आदि। इसलिए इसे जीव का “व्यवसाय (Profession)” कहा जाता है।

उदाहरण:

मेंढक का वास = तालाब।

मेंढक का निकेत = कीट खाकर भोजन श्रृंखला का हिस्सा बनना।

7. “मछली के पख उसके जलीय जीवन हेतु अनुकूलन हैं” इस कथन का तात्पर्य क्या है? व्याख्या करें।

उत्तर: अनुकूलन (Adaptation) वे विशेषताएँ हैं जो जीव को अपने वातावरण में जीवित रहने में मदद करती हैं।

मछली पानी में रहती है, इसलिए उसके पंख जलीय जीवन के अनुकूल बने होते हैं —

पंख तैरने में सहायता करते हैं।

शरीर का संतुलन बनाए रखते हैं।

दिशा बदलने में मदद करते हैं।

पानी के प्रतिरोध को कम करते हैं।

पाठगत प्रश्न 25.2

1. जन्म और मृत्यु की सम संख्या वाली जनसंख्या में कौन-सी प्रावस्था होती है?

(क) वृद्धि की त्वरण / (गतिवर्धन) प्रावस्था।

(ख) पठार (प्लेटो) प्रावस्था।

(ग) चरघातांकी वृद्धि प्रावस्था।

(घ) वृद्धि की आरंभिक प्रावस्था।

उत्तर: (ख) पठार (प्लेटो) प्रावस्था।

2. जब आबादी वहन (पालन) क्षमता तक पहुंच जाती है तो:

(क) मृत्यु दर = जन्म दर।

(ख) मृत्यु दर > जन्म दर।

(ग) मृत्यु दर < जन्म दर।

उत्तर: (क) मृत्यु दर = जन्म दर।

3. मानव आबादी (जनसंख्या) में होता है:

(क) ‘s’ आकृति युक्त वृद्धि वक्र।

(ख) ‘v’ आकृति युक्त वृद्धि वक्र।

(ग) ‘z’ आकृति युक्त वृद्धि वक्र।

उत्तर: (क) ‘s’ आकृति युक्त वृद्धि वक्र।

पाठगत प्रश्न 25.3

1. पारितंत्र को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: पारितंत्र पारिस्थितिकी के अध्ययन की स्वतंत्र कार्यकारी इकाई है जो जैविक व अजैविक घटकों के पारस्परिक संबंधों को दर्शाता है।

2. पारितंत्र के मुख्य घटक क्या हैं?

उत्तर: उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक (जैविक) + अजैविक घटक।

3. किसी पारितंत्र के लिए अपघटकों की अनिवार्यता का कारण स्पष्ट करें।

उत्तर: मृत जीवों एवं पादपों के ऊतकों के भंजन के लिये।

4. प्रकृति में अपघटक की भूमिका या कार्य क्या है?

उत्तर: प्रकृति में अपघटक उन जीवों को कहा जाता है जो सभी पोषण स्तरों के मृत कार्बनिक पदार्थों (अपरद) का भक्षण करते हैं। इनका मुख्य कार्य पोषक तत्वों का पुनश्चक्रण (Recycling) करना है, जिससे मृत अवशेषों से प्राप्त पोषक तत्व पुनः उत्पादकों (पौधों) को उपलब्ध हो सकें।

5. पौधों को स्वपोषी और प्राणियों को विषमपोषी क्यों कहा जाता है?

उत्तर: पौधे सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करके अपना भोजन स्वयं बनाने में सक्षम होते हैं, इसलिए उन्हें स्वपोषी कहा जाता है। इसके विपरीत, प्राणी अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और वे भोजन के लिए पौधों या अन्य जंतुओं पर निर्भर रहते हैं, इसलिए उन्हें विषमपोषी कहा जाता है।

6. खाद्यश्रृंखला का एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: खाद्यश्रृंखला का एक सरल उदाहरण इस प्रकार है: 

घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज/गिद्ध।

7. मेंढक के पोषण स्तर का नाम बताइये।

उत्तर: द्वितीयक उपभोक्ता।

8. साँप द्वितीयक अथवा तृतीयक उपभोक्ता दोनों हो सकता है, समझायें।

उत्तर: यदि साँप चूहे को खाता है, तो वह द्वितीयक उपभोक्ता कहलाता है।

यदि वह मेंढक (जो स्वयं एक मांसाहारी है) को खाता है, तो वह तृतीयक उपभोक्ता कहलाता है।

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