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Sankardev Class 5 Hindi Chapter 19 एक मुटठी सरसों
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एक मुटठी सरसों
Chapter – 19
HINDI
SANKARDEV SISHU VIDYA NIKETAN
मूलभाव: मानव जीवन में कोई भी चीज स्थायी नहीं है। अतः हमें व्यर्थ की चिंता न करते हुए सारे मोह -माया को त्यागकर वर्तमान के साथ गतिमान रहना चाहिए। प्रस्तुत पाठ में इसी के बारे में बताया गया है।
মূলভাৱঃ মানুহৰ জীৱনত কোনো বস্তুৱেই স্থায়ী নহয়। গতিকে আমি অনাহকত চিন্তা নকৰি গোটেই মোহ – মায়া ত্যাগ কৰি বৰ্তমানৰ লগত গতিমান হ’ব লাগে। এই পাঠটিত ইয়াৰ বিষয়ে কোৱা হৈছে।
शब्दार्थ:
इकलौते — अकेले (অকল, একমাত্র)
जीवन – दान — जिंदा करना (জীৱিত কৰা)
चीत्कार — गला फाड़ कर रोना (চিঞৰি কন্দা)
देहांत — मृत्यु (মৃত্যু)
दुखियारी — दुखी (দুখী)
मृतक — मरे हुए (মৃতক)
अवश्यम्भावी — जरूरी (প্রয়োজনীয়)
व्यर्थ — बेकार (ব্যর্থ)
अभ्यास
1. (क) औरत रोती हुई गोतम बुद्ध के पास क्यों आई?
उत्तरः औरत के एकलौते बेटे को साँप ने काट लिया था, जिससे वह मर गया था। इसलिए औरत रोती हुई गौतम बुद्ध के पास आई।
(ख) बुद्ध ने उसे क्या लाने को कहा?
उत्तरः बुद्ध ने उसे एक मुटठी सरसों लाने को कहा।
(ग) स्त्री को एक मुटठी सरसों क्यों नहीं मिली?
उत्तरः बुद्ध ने स्त्री को ऐसे घर से सरसों लाने को कहा, जिसके परिवार में अभी तक कोई मरा नहीं हैं। पर, स्त्री को ऐसा घर कहीं नहीं मिला जहाँ किसी की मृत्यु न हुई हो। इसलिए स्त्री को एक मुटठी सरसों नहीं मिली।
(घ) ‘क्या किसी ने तुम्हें सरसों नहीं दी?’ इस प्रशन का उस स्त्री ने क्या उत्तर दिया?
उत्तरः इस प्रशन का उत्तर देते हुए स्त्री ने कहा— “सरसों बहुत थी, किंतु मगध में एक भी घर ऐसा नहीं मिला जहाँ मौत नहीं हुई हो।”
(ङ) गौतम बुद्ध ने अंत में क्या उपदेश दिया?
उत्तरः गौतम बुद्ध ने अंत में उपदेश देते हुए स्त्री से कहा,— “तुम्हें सत्य का ज्ञान हो गया है। जब मृत्यु अवश्यम्भावी है, तो इस शरीर के लिए रोना – चिल्लाना व्यर्थ है। जाओ, अपने बच्चे का अंतिम संस्कार करो।”
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करो:
(क) संसार में जीवित तो कुछ ही हैं?
(ख) क्या तुम्हें बेटा नहीं चाहिए?
(ग) कहीं पुत्रियों का मरण हुआ था तो कहीं पुत्रों का।
(घ) मैं आपके पास उपदेश सुनने नहीं आई हूँ।
3. बहुवचन बनाओ:
चिड़िया — चिड़ियाँ।
स्त्री — स्त्रियाँ।
साँप— साँप।
लाल — लाल।
बहन — बहनें।
दुनिया — दुनिया।
माता — माताएँ।
औरत — औरतें।
4. शब्दों के जोड़ बैठाओः
गौतम — बुद्ध।
जीवनदान — दान।
रोना — चिल्लाना।
अंतिम — संस्कार।
भुटठी — भर।
निराश — माता।
5. इस पाठ में आई हुई सकर्मक क्रियाओं को चुनकर लिखो।
उत्तरः (क) गौतम बुद्ध उन दिनों मगध के पास किसी गाँव में ठहरे हुए थे।
(ख) मैं आपके पास उपदेश सुनने नहीं आई हूँ।
(ग) तुम्हें सत्य का ज्ञान हो गया है।

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