NCERT Class 9 Hindi Chapter 1 दो बैलों की कथा

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NCERT Class 9 Hindi Chapter 1 दो बैलों की कथा

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Chapter: 1

गद्य खंड
अभ्यास

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?

(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता।

(ख) एकता और सहयोग।

(ग) गर्व और दंभ।

(घ) विद्रोह और क्रोध।

उत्तर: (ख) एकता और सहयोग।

कारण: हीरा और मोती हमेशा साथ रहते थे और एक-दूसरे से गहरा प्रेम करते थे। जब उन पर एक भयानक साँड़ ने हमला किया, तो दोनों ने एक संगठित शत्रु की तरह मिलकर दोहरी मार करके उसे हराया। इसके अलावा, काँजीहौस में जब हीरा को मोटी रस्सी से बाँध दिया गया, तो भागने का अवसर होने पर भी मोती ने अपने मित्र को संकट में छोड़कर जाने से मना कर दिया।

2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?

(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।

(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।

(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।

उत्तर: (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

कारण: जब झूरी ने बैलों को अपने साले गया के घर भेजा, तो बैलों ने यही समझा कि उनके मालिक ने उन्हें बेच दिया है। उन्होंने झूरी की सेवा में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी थी, इसलिए अपना इस तरह बेचा जाना उन्हें बहुत बुरा लगा और उनके भीतर “आहत सम्मान की व्यथा” उत्पन्न हुई।

3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?

(क) कष्टों से बचने के लिए।

(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए।

(ग) अभिमान की रक्षा के लिए।

(घ) अपनापन पाने के लिए।

उत्तर: (घ) अपनापन पाने के लिए।

कारण: गया के घर पहुँचने पर उन्हें वह नया घर, नया गाँव और नए आदमी सब बेगानों-से (पराए) लग रहे थे। उनका दिल भारी हो रहा था क्योंकि जिस झूरी के घर को वे अपना समझते थे, वह छूट गया था। इसी अपनेपन की तलाश और पुराने घर के स्नेह ने उन्हें रस्सियाँ तोड़कर लौटने पर मजबूर किया।

4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?

(क) स्वाभिमान।

(ख) अहिंसा।

(ग) पराधीनता।

(घ) अन्याय की रक्षा।

उत्तर: (क) स्वाभिमान।

कारण: झूरी के घर बैलों को इतना सम्मान मिलता था कि उन्हें “फूल की छड़ी से भी न छूता था”। लेकिन गया के घर उन्हें मार पड़ी और सूखा भूसा मिला, जिससे उनके सम्मान को गहरी ठेस पहुँची। जब गया ने निर्दयता से हीरा की नाक पर डंडे जमाए, तो अपनी इसी आहत गरिमा और स्वाभिमान के कारण मोती का गुस्सा फूट पड़ा और वह हल लेकर भाग खड़ा हुआ।

5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?

(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए।

(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए।

(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए।

(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए।

उत्तर: (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए।

कारण: लेखक ने बताया है कि पशु बिना बोले भी मूक-भाषा में एक-दूसरे के मन की बात और संवेदनाओं को समझ लेते हैं। इस मूक-भाषा के प्रयोग से लेखक यह दिखाना चाहते हैं कि पशुओं में भी विचार-विनिमय करने की ऐसी “गुप्त शक्ति” और गहरी चेतना होती है, जिससे खुद को श्रेष्ठ समझने वाला मनुष्य भी वंचित है।

6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?

(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के।

(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के।

(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के।

(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के।

उत्तर: (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के।

कारण: पाठ में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि “स्वतंत्रता सहज ही नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है” और यह कथा परोक्ष रूप से स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी है। हीरा और मोती का शोषकों (गया, काँजीहौस, दढ़ियल) से डटकर टकराना और अपनी आज़ादी के लिए बार-बार जान जोखिम में डालना, भारतीय जनता के स्वतंत्रता संग्राम का ही सटीक प्रतीक है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—

1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?

उत्तर: बैलों को लगा कि उनके मालिक झूरी ने उन्हें बेच दिया है। उन्हें वह नया घर, नया गाँव और नए आदमी बेगानों जैसे लग रहे थे, इसलिए भारी मन और अपनापन न मिलने के कारण उन्होंने काम करने से इनकार कर दिया।

2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्त्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे? (संकेत- वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)

उत्तर: बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि यह उनके और उनके मालिक के बीच के गहरे प्रेम, वफादारी और विद्रोह की भावना का प्रतीक था।

वे क्यों लौट आए: जब झूरी ने अपने बैलों (हीरा और मोती) को अपने साले गया के घर भेजा, तो बैलों को लगा कि उनके मालिक ने उन्हें बेच दिया है। उन्हें वह नया घर, नया गाँव और वहाँ के नए आदमी सब बेगानों जैसे लग रहे थे। उनका दिल भारी था और वहाँ अपनापन न मिलने के कारण उन्होंने निर्णय लिया कि वे वहाँ नहीं रहेंगे। जब रात को गाँव में सब सो गए, तो उन्होंने अपनी दूनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए बहुत मजबूत रस्सियों (पगहों) को एक ही झटके में तोड़ दिया और अपने पुराने घर की ओर लौट चले।

बैलों और झूरी के मन के भाव: जब वे सुबह झूरी के घर पहुँचे, तो बैलों की आँखों में ‘विद्रोहमय स्नेह’ झलक रहा था। इसका अर्थ है कि उनके मन में नया स्थान थोपे जाने का विद्रोह था, लेकिन अपने सच्चे मालिक (झूरी) के लिए अगाध प्रेम भी था। झूरी भी अपने बैलों को वापस देखकर स्नेह से गद्गद हो गया। उसने दौड़कर उन्हें गले लगा लिया और उनके प्रेमालिंगन तथा चुंबन का वह दृश्य बहुत ही मनोहर था।

घटना का महत्त्व: यह घटना गाँव के लिए भी बहुत महत्त्वपूर्ण बन गई। घर और गाँव के लड़के जमा हो गए और तालियाँ बजा-बजाकर उनका स्वागत करने लगे। बाल-सभा ने तो यह तक निश्चय किया कि दोनों पशु-वीरों को अभिनंदन-पत्र (सम्मान) दिया जाना चाहिए।

वास्तविक जीवन में पशुओं का व्यवहार: कहानी से यह स्पष्ट होता है कि वास्तविक जीवन में भी पशु केवल निर्जीव वस्तुएँ या मशीन नहीं होते। मनुष्य की तरह पशुओं में भी चेतना होती है और वे भी प्रेम, आत्मीयता तथा सम्मान के भूखे होते हैं। जहाँ उन्हें स्नेह और अपनापन मिलता है, वे हमेशा उसी स्थान पर रहना चाहते हैं।

3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!”

‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।

उत्तर: ‘दो बैलों की कथा’ कहानी में कई ऐसे प्रसंग आए हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि अन्याय को चुपचाप सहने के बजाय, अपनी आज़ादी, स्वाभिमान और प्राणों की रक्षा के लिए कभी-कभी संघर्ष करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

इसके प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:

(i) गया के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष: जब गया ने दोनों बैलों को हल में जोतकर निर्दयता से डंडे मारे और खाने को केवल सूखा भूसा दिया, तो उनका स्वाभिमान आहत हुआ। ऐसे में अत्याचार सहने के बजाय मोती का गुस्सा बेकाबू हो गया और उसने हल, रस्सी, जुआ और जोत सब तोड़-ताड़ कर संघर्ष किया।

(ii) जान बचाने के लिए सांड से संघर्ष: जब रास्ते में एक विशाल और भयंकर सांड ने उन पर हमला किया, तो उनके पास भागने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने भागने को ‘कायरता’ माना। अपनी जान बचाने के लिए यह आवश्यक था कि वे लड़ें। दोनों ने मिलकर योजना बनाई और अपनी जान हथेली पर रखकर उस शक्तिशाली सांड से कड़ा संघर्ष किया और अंततः उसे हरा दिया।

(iii) कांजीहौस में अन्य जानवरों की रक्षा के लिए संघर्ष: कांजीहौस में जब उन्हें दिन-भर खाने को एक तिनका भी नहीं मिला और उन्होंने अन्य जानवरों (भैंसें, बकरियाँ, घोड़े आदि) को कमज़ोरी के कारण मुर्दों की तरह पड़े देखा, तो उनके मन में विद्रोह की ज्वाला भड़क उठी। अपनी और अन्य कमज़ोर जानवरों की आज़ादी के लिए उन्होंने डंडे खाकर भी कांजीहौस की कच्ची दीवार को सींगों से मार-मारकर तोड़ दिया, जिससे नौ-दस प्राणियों की जान बच गई।

(iv) दढ़ियल (कसाई) का विरोध: कहानी के अंत में जब नीलाम होने के बाद दढ़ियल (कसाई) उन्हें झूरी के घर से ज़बरदस्ती ले जाने लगा और उन पर डंडा उठाया, तो मोती ने उसे सींग मारकर खदेड़ दिया और गाँव के बाहर तक भगाकर अपने प्राणों और अपनी आज़ादी की रक्षा की।

4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।

उत्तर: हीरा और मोती स्वतंत्रता और अपनापन दोनों ही चाहते थे, लेकिन कहानी के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि वे ‘अपनापन’ की भावना से अधिक प्रेरित थे।

इसे निम्नलिखित कारणों से अच्छी तरह समझा जा सकता है:

(i) आज़ादी से ज़्यादा मित्र का साथ: जब कांजीहौस की आधी दीवार टूट गई और बाकी सभी जानवर भाग गए, तब मोती आसानी से आज़ाद हो सकता था। परंतु जब उसने देखा कि हीरा मोटी रस्सी से बँधा है, तो उसने आज़ादी को ठुकरा कर अपने मित्र के साथ अपनापन निभाते हुए वहीं बँधे रहना स्वीकार किया।

(ii) स्वतंत्र होने पर घर लौटना: जब दढ़ियल कसाई उन्हें ले जा रहा था और अचानक उन्हें अपने परिचित रास्ते का ज्ञान हुआ, तो वे अपनी जान बचाकर किसी जंगल या अनजान जगह पर पूर्णतः स्वतंत्र होने के बजाय सीधे झूरी के घर (अपने थान) की ओर भागे।

(iii) प्रेम के भूखे: गया के घर उन्हें आज़ादी नहीं, बल्कि प्रेम और अपनापन की कमी खटक रही थी। वहीं भैरव की अनाथ छोटी बच्ची से आत्मीयता मिलने पर वे दिन भर की मार और सूखा भूसा भी सह लेते थे। अतः, वे केवल स्वच्छंद नहीं होना चाहते थे, बल्कि वे अपने मालिक झूरी के अगाध प्रेम और उस स्थान के लिए लालायित थे जहाँ उन्हें अपनापन मिलता था।

5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।”

‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’— क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। प्रेमचंद जी ने इस कहानी के माध्यम से स्पष्ट किया है कि चुपचाप अत्याचार सहने से अत्याचारी का मनोबल और क्रूरता और बढ़ जाती है, इसलिए अन्याय का विरोध करना अत्यंत आवश्यक है।

इसके निम्नलिखित कारण और उदाहरण कहानी में मिलते हैं:

(i) गया के घर जब दोनों बैलों को हल में जोतकर बहुत मारा गया और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाई गई, तो उन्होंने चुपचाप अत्याचार सहने से इनकार कर दिया। मोती ने अपना कड़ा आक्रोश प्रकट करते हुए हल, जुआ, जोत सब तोड़ दिया।

(ii) कांजीहौस में जब उन्हें और अन्य जानवरों को कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखकर मरने के लिए छोड़ दिया गया था, तब उन्होंने उस अन्याय को अपनी नियति मानकर स्वीकार नहीं किया। हीरा ने अपनी बची हुई शक्ति से कच्ची दीवार को गिराना शुरू किया और बाद में मोती ने भी दीवार तोड़कर अन्य निर्बल और अधमरे जानवरों को आज़ाद कराया।

(iii) दढ़ियल कसाई के अन्याय और डंडे का भी मोती ने डटकर सामना किया और उसे सींग मारकर गाँव के बाहर खदेड़ दिया। इन घटनाओं से सिद्ध होता है कि वे अन्याय को मूक दर्शक बनकर सहने के पक्ष में नहीं थे।

6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।

उत्तर: हीरा और मोती की गहरी और अभिन्न मित्रता को कहानी की निम्नलिखित घटनाओं से स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है:

(i) एक-दूसरे से अगाध प्रेम और साझेदारी: दोनों बैल जब भी हल या गाड़ी में जोते जाते, तो दोनों की यही कोशिश रहती कि ज़्यादा-से-ज़्यादा बोझ उसी की अपनी गर्दन पर रहे। काम के बाद वे एक-दूसरे को चाट-सूँघकर थकान मिटाते थे। नाँद में एक साथ मुँह डालते और एक के मुँह हटाने पर दूसरा भी मुँह हटा लेता था।

(ii) संकट के समय एक-दूसरे की रक्षा करना: रास्ते में जब एक विशाल साँड़ ने उन पर हमला किया, तो उन्होंने भागने को ‘कायरता’ मानकर योजना बनाई। दोनों ने एक साथ मिलकर उस साँड़ पर आगे-पीछे से दोहरी मार की और एक-दूसरे की जान बचाई।

(iii) मुसीबत में साथी को न छोड़ना: जब मटर के खेत में पेट भर जाने के बाद मोती कीचड़ में फँस गया और रखवालों द्वारा पकड़ा जाने लगा, तो सुरक्षित होने के बावजूद हीरा वापस लौट आया, क्योंकि वह अपने मित्र को मुसीबत में छोड़कर अकेले नहीं भागना चाहता था (फँसेंगे तो दोनों फँसेंगे)। कांजीहौस में भी मोती ने बँधे हुए हीरा को छोड़कर भागने से साफ इनकार कर दिया था।

7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।

उत्तर: कहानी में मालकिन (झूरी की पत्नी) और छोटी लड़की (भैरो की बेटी), दोनों का बैलों के प्रति व्यवहार एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न था:

छोटी लड़की का व्यवहार: छोटी लड़की की माँ मर चुकी थी और उसकी सौतेली माँ उसे बहुत मारती थी। इस कारण वह हीरा-मोती के दुख और पीड़ा को गहराई से समझती थी। उसके मन में बैलों के प्रति असीम प्रेम, करुणा और आत्मीयता थी। वह रात को छुपकर उन्हें प्यार से दो रोटियाँ खिलाती थी और अंततः उसी ने दया करके उनके गले की रस्सी (गराँव) खोल दी ताकि वे गया के अत्याचारों से भाग सकें।

मालकिन का व्यवहार: इसके विपरीत, झूरी की पत्नी (मालकिन) का व्यवहार शुरुआत में बैलों के प्रति बहुत कठोर, रूखा और क्रोध से भरा था। जब बैल पहली बार गया के घर से भागकर आए, तो उसने उन्हें ‘नमक-हराम’ और ‘कामचोर’ कहा और गुस्से में मज़दूर को सख़्त ताकीद दी कि इन्हें केवल सूखा भूसा ही खाने को दिया जाए।

मेरी कल्पना मेरे अनुमान

1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली– खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?

उत्तर: यदि मैं वह छोटी लड़की होती, तो मैं भी बैलों के प्रति सहानुभूति रखती। मैं उन्हें चुपके से रोटियाँ खिलाने के साथ-साथ अपने पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को समझाने का प्रयास करती कि इन बेज़ुबान जानवरों के साथ क्रूरता न करें। अंततः, यदि वे नहीं मानते, तो मैं भी उन्हें गया के अत्याचारों से बचाने के लिए उनकी रस्सी खोलकर उन्हें आज़ाद कर देती, जैसा कि उस छोटी बच्ची ने किया था।

2. “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रहता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।

उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। कई बार डर, संकोच या आत्मविश्वास की कमी के कारण मनुष्य या प्राणी मिले हुए अवसर का लाभ नहीं उठा पाते। कहानी में जब दीवार टूट गई थी और अन्य सभी जानवर भाग गए थे, तब भी दोनों गधे यह सोचकर वहीं खड़े रहे कि “जो कहीं फिर पकड़ लिए जाएँ!”। वास्तविक जीवन में भी कई बार असफलता या जोखिम के डर से लोग नए अवसर ठुकरा देते हैं और अपनी उसी दयनीय स्थिति में पड़े रहते हैं।

मेरे अनुभव मेरे विचार

1. “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।

उत्तर: हाँ, मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ। सच्ची दोस्ती में औपचारिकता नहीं होती। दोस्तों के बीच थोड़ी-बहुत मस्ती, छेड़छाड़ और हँसी-मज़ाक होना स्वाभाविक है। इससे मित्रता गहरी और आत्मीय होती है। मेरे अनुभव में भी, जिन दोस्तों के साथ मैं खुलकर हँसी-मज़ाक कर सकता हूँ, उन्हीं पर मुझे सबसे अधिक विश्वास होता है। बिना हँसी-मज़ाक के दोस्ती केवल जान-पहचान जैसी ही लगती है।

2. “हीरा ने तिरस्कार किया– गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं— हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?

उत्तर: इस संबंध में दोनों के विचार अपनी-अपनी जगह तर्कसंगत प्रतीत होते हैं। हीरा के विचार भारतीय आदर्शों और नैतिकता पर आधारित हैं। वहीं मोती के विचार व्यावहारिक और आत्मरक्षा से प्रेरित हैं, क्योंकि शत्रु को छोड़ने पर वह दोबारा हमला कर सकता है। फिर भी, मैं हीरा के विचारों के अधिक निकट हूँ, क्योंकि शत्रुता में भी मानवता और नैतिक मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए।

3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।

उत्तर: मेरे जीवन में भी ऐसा ही एक पल आया था। पिछले साल भारी बारिश में स्कूल से लौटते समय मेरे दोस्त राहुल की साइकिल बुरी तरह पंचर हो गई। पानी से भरी सुनसान सड़क पर मैं चाहता तो अपनी साइकिल से जल्दी घर पहुँच सकता था, लेकिन उसे उस मुसीबत में अकेला छोड़ना मुझे स्वार्थ लगा।

मैंने अपनी साइकिल से उतरकर उसके साथ पैदल चलने का फैसला किया। तेज़ बारिश और जलभराव के बीच हम एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए, साइकिलें खींचते हुए एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित घर पहुँचे।

इस घटना ने हमारी मित्रता को और गहरा कर दिया और मुझे सिखाया कि अपनों के साथ मिलकर बड़ी से बड़ी चुनौती को भी आसानी से पार किया जा सकता है।

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