SEBA Class 10 Hindi MIL Important Chapter 15 बरगीत Solutions As Per SEBA New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 10 Hindi MIL Additional Solutions and select need one. SEBA Class 10 Hindi MIL Additional Notes Download PDF. SEBA Important Solutions for Class 10 Ambar Bhag 2.
SEBA Class 10 Hindi MIL Important Chapter 15 बरगीत
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बरगीत
Chapter: 15
| काव्य खंड |
| IMPORTANT QUESTION ANSWER |
1. बारगीत के रचयिता के नाम क्या है?
उत्तर: श्रीमंत शंकरदेव।
2. भारतीय – साहित्य में शंकरदेव का क्या योगदान है?
उत्तर: भारतीय – साहित्य में शंकरदेव का उल्लेखनीय योगदान रहा है। कबीर, सुर, तुलसी की तरह वे भी एक शीर्षस्थ भक्त कवि थे।
3. उनका जन्म कहा हुआ था?
उत्तर: श्रीमंत शंकरदेव का जन्म असम के नगांव के अखिलपुखी नमक स्थान में हुआ था।
4. उनके माता और पिता का नाम क्या था?
उत्तर: उनके माता का नाम सत्यसंध्या और पिता कुसुंबर भूयां।
5. उनका पालन – पोषण किसने किया था?
उत्तर: बचपन में ही उनके माता – पिता की मृत्यू होने के कारण बालक शंकरदेव का का पालन – पोषण उनकी दादी खेरसुती ने किया था।
6. शंकरदेव के गुरु का नाम क्या था?
उत्तर: शंकरदेव के गुरु महेंद्र कंदली थे।
7. शंकरदेव के जीवन का कीर्तिस्तंभ क्या है?
उत्तर: “कीर्तन – घोषा”।
8. शंकरदेव किस धर्म के प्रवर्तक थे?
उत्तर: नववैष्णव धर्म के प्रवर्तक थे।
9. असम साहित्य के निर्माता किसे कहते है?
उत्तर: श्रीमंत शंकरदेव।
10. श्रीमंत शंकरदेव के नाम के पहले श्रीमंत, महापुरुष, गुरु आदि शब्द क्यों जोड़े जाते हैं?
उत्तर: शंकरदेव असाधारण व्यक्तित्व के अधिकारी थे इसी कारण श्रद्धापूर्वक उनके नाम के पहले सदैव श्रीमंत, महापुरुष, गुरु आदि शब्द जोड़ते है।
11. उनका निधन कहा हुआ था?
उत्तर: उनका निधन मधुपुर सत्र, कोचबिहार में हुआ था।
12. भारतीय नाटक – साहित्य में शंकरदेव के योगदान को लिखिए?
उत्तर: भारतीय नाटक – साहित्य में में भी शंकरदेव का स्तुत्य योगदान रहा है। उन्होंने चिह्नयात्रा, रुक्मिणीहरण, परिजात – हरण, केलीगोपाल, कालिया – दमन, और रामविजय नामक अंकिया नाटकों की रचना की। “भक्ति- रत्नाकर” शंकरदेव द्वारा रचित एक अनमोल ग्रंथ है। संवादविहीन नाटक “चिह्नयात्रा” के जरिए शंकरदेव ने असामीय नाटक के इतिहास का श्रीगणेश किया था।
13. श्रीमंत शंकरदेव के असमिया साहित्य के योगदान का उल्लेख किजिए?
उत्तर: भारतीय भक्ति – साहित्य में असमिया साहित्य का उल्लेखनीय योगदान रहा है। वे केवल धर्मगुरु ही नही, बल्कि एक महान युगद्रष्टा कवि, साहित्यकार, नाटककार, टिकाकार, अनुवादक, गीतकार, अभिनेता तथा समाज – सुधारक व संगठक थे। इन्होंने सम्पूर्ण असमिया जाती के एक सूत्र में पिरोकर एकता, मैत्री और संस्कार की भावना को सुदृढ़ किया। धर्म के अतिरिक्त साहित्य – संस्कृति के प्रचारार्थ संस्कृत ग्रंथों का शंकरदेव ने गहन अध्ययन कर उनसे सारतत्व ग्रहण किए और गीत, पद, नाटक, उपाख्यान आदि की रचना की। इस प्रकार उन्होंने असमिया साहित्य के भंडार की श्रीवृद्धि की।
14. उनके काव्य रचनाओं के नाम लिखिए?
उत्तर: उनके काव्य रचनाओं के नाम है: रुक्मिणीहरण और हरीशचंद्र उपाख्यान।
15. उनके किन्हीं दो ग्रंथ के नाम लिखिए?
उत्तर: कीर्तन घोषा और भक्ति – रत्नाकर।
16. पण्डिते पढ़ें शास्त्र मात्र सार भकते लीयै इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए?
उत्तर: उक्त पंक्तियां अंबर भाग 2 के बरगीत नमक कविता से ली गई है इसके कवि श्रीमंत शंकरदेव जी है।
उक्त पंक्ति के माध्यम से कवि यह कहना चाहते है की जिस प्रकार कमल के फूल अपने अंतर में स्थित मधुररस निकल देते है, परंतु उसका पान कर आनंद लूटनेवाला मधुकर होता है ठीक उसी प्रकार पंडित केवल शास्त्रों का पाठ करते है परंतु उनके सारतत्व को भक्त ग्रहण करते है।

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