Niketan Class 8 Sanskrit Chapter 18 सूकतयः

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सूकतयः

Chapter – 18

संस्कृत

SANKARDEV SISHU NIKETAN

१. सुक्तयाशान मेलयत-

यथा – यत्र नार्यस्तु पुज्यन्ते – रमन्ते तत्र देवता –

(क)(ख)
उद्यमेन हि सिद्धन्तिस पन्थाः
यादृशी भावना यस्यमहतां धनम
परोपकार पूव्यायपूत्रोहं पृथिव्या
माता भूमिःपापाय परपीडनम
मानो हिसिद्धिर्भवति तादृशी
महाजनो येन गतःकार्याणि न मनोरथै

उत्तर:- 

(क)(ख)
उद्यमेन हि सिद्धन्तिकार्याणि न मनोरथै
यादृशी भावना यस्यसिद्धिर्भवति तादृशी
परोपकार पूव्यायपापाय परपीडनम
माता भूमिःपूत्रोहं पृथिव्या
मानो हिमहतां धनम
महाजनो येन गतःस पन्थाः

२. रिक्त स्थानानि पूरयत-

क) शठे शाठ्यं समाचरेत ।

ख) साहसे खलु श्री वसति ।

ग) तपसा किं न सिध्यति ?

घ) विद्याधनं सर्वधनप्रधानम।

ङ) शीलं परं भूषणम ।

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