Assam Jatiya Bidyalay Class 8 Hindi Chapter 12 गौरा

Assam Jatiya Bidyalay Class 8 Hindi Chapter 12 गौरा, Assam Jatiya Vidyalaya | অসম জাতীয় বিদ্যালয় Hindi Class 8 Question Answer to each chapter is provided in the list of SEBA so that you can easily browse through different chapters and select needs one. Assam Jatiya Bidyalay Chapter 12 गौरा Class 8 Hindi Question Answer can be of great value to excel in the examination.

Join Telegram channel

Assam Jatiya Bidyalay Class 8 Hindi Chapter 12 गौरा Notes covers all the exercise questions in Assam Jatiya Bidyalay SEBA Textbooks. The Assam Jatiya Bidyalay Class 8 Hindi Chapter 12 गौरा provided here ensures a smooth and easy understanding of all the concepts. Understand the concepts behind every chapter and score well in the board exams.

गौरा

Chapter – 12

অসম জাতীয় বিদ্যালয়

EXERCISE QUESTION ANSWER

शब्दार्थ :

बछियागाय की बच्ची
अभ्रकअबरक, एक धातु
लगावस्नेह
साहचर्यजनितसाथ रहने या संगति से संबद्धित
श्वेतसफेद
वलयगोल आकृति
गेरूजमीन से निकलनेवाली लाल मिट्टी जो रँगने में काम आती है
निष्प्रभआभाहीन, उज्वलताहीन
वयः सन्धिगाय के बराबर, वयष्क

अभ्यास माला

प्रश्न – १ : सही वाक्य में (✓) का और गलत वाक्य में (x) का चिह्न लगाओ :

(क) गौरा एक बछिया का नाम था।

(ख) गौरा वास्तव में बहुत प्रियदर्शनी थी। 

(ग) गौरा लोगों से धुलमिल नहीं गई थी।

(घ) महादेवी जी ने गौरा के पार्थिव शरीर को गंगा में समर्पित किया था।

उत्तर : (क) गौरा एक बछिया का नाम था। ✓

(ख) गौरा वास्तव में बहुत प्रियदर्शनी थी। ✓

(ग) गौरा लोगों से धुलमिल नहीं गई थी। x

(घ) महादेवी जी ने गौरा के पार्थिव शरीर को गंगा में समर्पित किया था। ✓

प्रश्न – २ : पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :

(क) गौरा कौन थी ?

उत्तर : गौरा मेरी बहिन के घर पली हुई गाय की वयः सन्धि तक पहँची हुई बछिया थी।

(ख) गौरा को पालने का सुझाव महादेवी जी को किसने दिया ?

उत्तर : गौरा को पालने का सुझाव महादेवी जी को उनकी बहिन ने दिया।” 

(ग) ‘गाय करुणा की कविता है’ किसने कहा था और क्यों ?

उत्तर : ‘गाय करूणा की कविता है -महात्मा गांधी ने कहा था क्यों कि उसकी काली बिल्लौरी आँखों का तरल सौन्दर्य तो दृष्टि को बांधकर स्थिर कर देता था।

(घ) गौरा के बछड़े का नाम क्या था ? 

उत्तर : गौरा के बछड़े का नाम लालमणि था।

(ङ) गौरा की मृत्यु का कारण क्या था ? 

उत्तर : गौरा की मृत्यु का कारण सुई खिला दिया गया था।

प्रश्न – ३ : संक्षिप्त उत्तर दो : 

(क) गौरा की आकृति का वर्णन करो।

उत्तर : गौरा की आकृति इस प्रकार की थी पुष्ट लचीले पैर, भरे पुट्ठे चिकनी भरी हुई पीठ, लम्बी सुडौल गर्दन, निकलते हुए छोटे-छोटे सींग, भीतर की लालिमा की झलक देते हुए कमल की दो उधखुवी पंखुड़ियों जैसे कान, लम्बो और अन्तिम छोर पर काले सघन चामर का स्मरण दिलानेवाली पूँछ, सब कुछ साँचे में ढला हुआ-सा था। गाय को मानो इटैलियन मार्बल में तराशकर उस पर ओप दो गई होl

(ख) महादेवी वर्मा जी के घर गौरा का स्वागत किस प्रकार हुआ ?

उत्तर : जब गौरा महादेवी बर्मा जी के घर पहुँची, तब उनके परिचितों और परिचारकों में श्रद्धा का ज्वर-सा उमड़ आया। उसे लाल सफेद गुलाबों की माला पहनाई गई, केशर-रोली का बड़ा-सा टीका लगाया गया, घी का चौमुखा दिया जलाकर आरती उतारी गई और उसे दही-पेड़ा पिलाया गया। उसका नामकरण हुआ गौरांगनी या गौरा पता नहीं, इस पूजाअर्चा का उस पर क्या प्रभाव पड़ा. परन्तु वह बहुत प्रशन्न जान पड़ी।

(ग) “गाय करूना की कविता है”। आशय स्पष्ट करो। 

उत्तर : गौरा की अलस मन्थर गति से तुलना करने योग्य कम वस्तुए हैं। तीब्र गति में सौन्दर्य है, परन्तु वह मन्थर गति के सौन्दर्य को नहीं पाता। बाण की तीव्र गति क्षण भर के लिए दृष्टि में चकाचौंध उत्पन्न कर सकती है, परन्तु मन्द समीर से फुल का अपने वृन्त पर हौले-हौले हिलना दृष्टि का उत्सव है। कुछ ही दिनों में गौरा इतनी घुल-मिल गई, कि घर के सभी से आवाज से नहीं पैर की आहट से पहचानने लगी। समय का इतना अधिक बोध उसे हो गया था कि मोटर के आवाज पाकर बाँ-बाँ की ध्वनि से महादेवी वर्मा जी को पुकारने गलती थी। भोजन, नाश्ता के समय का भी परिचित थी। थोड़ी देर होने पर रंभा-रंभाकर सिर पर उठा लेती थी। उसकी व्यवहार सभी को मोहित कर दिया था। 

(घ) गौरा के अन्य जीव-जन्तुओं के साथ व्यवहार का वर्णन अपने शब्दों में करो।

उत्तर : कुछ ही दिनों में वह सबसे इतनी हिलमिल गई कि अन्य पशु-पक्षी अपनी लधुता और उसकी विशालता का तखे भूल गए। कुत्ते-बिल्ली उसके पेट के नीचे और पैरों के बीच में खेलने लगे। पक्षी उसकी पीठ और माथे पर बैठकर उसके कान तथा आँखें खुजलाने लगे। वह भी स्थिर खड़ी रहकर और आँखे मूँदकर मानों उनसे सम्पर्क बढ़ा रही हो।

(ङ) लालमणि को आकृति के वर्णन में लेखिका वर्मा जी ने क्या कहा है ?

उत्तर : लालमणि अपने लाल रंग के कारण गेरु का पुतला जैसा जान पड़ता था। उसके माथे पर पान के आकार का श्वेल तिलक और चारों पैरों में खुरों के उपर सफेद वलय ऐसे लगते थे मानो गेरू की बनी वत्स मूर्ति को चाँदी के आभूषयों से अलंकृत कर दिया गया हो। लालमणि को सब प्यार से लालु सम्बोधन से पुकारने लगे। माता-पुत्र दोनों निकट रहने पर हिमराशि और जलते अंगारे का स्मरण कराते थे।

(च) गौरा के दूध-दोहन के लिए किसे नियुक्त किया गया और क्यों ? 

उत्तर : गौरा के दूध-दोहन के लिए एक ग्वाला को नियुक्त किया गया। क्योंकि महादेवी जी दुग्ध-दोहन की समस्या कोई स्थायी समाधान चाहती थीं। नौकरों में नागरिक तो दुहना जानते ही नहीं थे और जो गाँव से आए थे, वह अनम्यास के कारण यह कार्य भूल चुके थे कि घंटो लगा देते थे। इसलिए गौरा के दूध देने से पहले जो ग्वाला दूध देता था, जब उसने इस कार्य के लिए अपनी नियुक्ति के विषय में आग्रह किया तब महादेवी वर्मा जी ने उसे दुग्ध दोहन के लिए रखा था।

(छ) गौरा ने क्यों दाना-चारा खान कम कर दिया था ? पशु चिकित्सक ने इसके संबंध में क्या कहा था ?

उत्तर : गौरा बीमार होने के कारण दाना-चारा खाना कम कर दिया था। चिकित्सक ने निरीक्षण परीक्षण, एकसरे आदि द्वारा पता लगाने की कोशिश करते रहे। अन्त में उन्होंने कहा, गाय को किसी ने सुई खिला दी है। जो उसके रक्त संचार के साथ हृदय तक पहुँच गई है। सुई गाय के हृदय के पार हो जाएगी, तब रक्त संचार रूकने से उसकी मृत्यु निश्चित है।

(ज) गौरा के रोग उपचार के लिए क्या-क्या किए गए ? 

उत्तर : गौरा के रोग उपचार के लिए पशु चिकित्सक को बुलाया गया। चिकित्सक कई दिनों तक उपचार करते रहे। परीक्षण निरिक्षण करने के उपरांत यह निर्णय लिया गया कि इसे किसी ने सुई खिला दिया है। डॉक्टरों ने गाय को सेब का पस पिलाने की सलाह दी, क्यों कि सेब के रस से सुई पर कैल्शियम जम जाने और उसके न चुभने की सम्भावना है। अतः प्रति दिन कई-कई सेर सेब के रस पिलाया जाने लगा। शक्ति के इंजेक्शन दिए जाने लगे।

(झ) लालमणि का अपनी माँ गौरा के प्रति व्यवहार का वर्णन करो।

उत्तर : लालमणि वेचारे की तो माँ को व्याधि और आसन्न मृत्यु का बोध नहीं था। उसे दूसरी गाय का दूध पिलाया जाता था, जो उसे रूचता नहीं था। वह तो अपनी माँ का दूध ही पीना और उससे खेलना चाहता था, अतः अवसर मिलते ही वह गौरा के पास पहुँचकर या अपना सिर मार-मार, उसे उठाना चाहता था या खेलने के लिए उसके चारों ओर उद्दल-कूदकर परिक्रमा ही देता रहता।

प्रश्न – ४ ( क ) वाक्य बनाओ : 

ब्राह्ममुहूर्त, दुधिया, प्रियदर्शनी, मन्थर, कृतज्ञता

उत्तर : ब्राह्ममुहूर्त : गौरा ने ब्राह्ममुहूर्त में प्राण त्याग की।

दुधिया : गौरा दुधिया गाय थी। प्रियदर्शनी: गौरा वास्तव में प्रियदर्शनी थी।

मन्थर : गौरा मन्थर गति से चलती थी।

कृतज्ञता : महादेवी जी ने गौरा की कृतज्ञता को भूला नहीं पायी। 

(ख) रिक्त स्थानों की पूर्ति रेखांकित शब्दों के विलोम रूप से करो : 

(अ) गुण और ___देखकर ही मित्र बनना चाहिए।

उत्तर : गुण और दोष देखकर ही मित्र बनना चाहिए।

(आ) ज्ञान हमें अंधकार से ___की ओर ले जाता है।

उत्तर : ज्ञान हमें अंधकार से उजाला की ओर ले जाता है।

(इ) सचिन अपनी आय की तुलना में ___अधिक करता है। 

उत्तर : सचिन अपनी आय की तुलना में व्यय अधिक करता है। 

(ई) सुबह जलदी उठना एक अच्छा अभ्यास है, जो ___के कारण मिट भी सकता है।

उत्तर : सुबह जलदी उठना एक अच्छा अभ्यास है, जो अनाम्यास के कारण मिट भी सकता है। 

(उ) ___जाकर स्वदेश की याद आती है।

उत्तर : विदेश जाकर स्वदेश की याद आती है।

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Scroll to Top
Scroll to Top
adplus-dvertising